
40 की उम्र से पहले रखे सेहत का ख्याल,तो बढ़ जाएगा बुढ़ापे में हार्ट अटैक ( Heart Attack Disease )का खतरा
केस-1 रमेश अरोरा(परिवर्तित नाम) अपने दांत का दर्द दिखाने अस्पताल पहुंचे। एक्स-रे में रिपोर्ट सामान्य आई। डेंटिस्ट ने उन्हें हार्ट स्पेशलिस्ट से सलाह लेने के लिए भेजा। ईसीजी में पता चला कि ये लक्ष्ण हार्ट अटैक के हैं।
केस-2 राहुल(परिर्तित नाम) ने दांत दर्द की शिकायत की तो डेंटिस्ट ने उनका एक दांत उखाड़ दिया। इसके बाद भी जब दर्द कम नहीं हुआ। डेंटिस्ट भी रोग को समझ नहीं पाए। चार दिन बाद मरीज को मेजर अटैक आया।
भोपाल। दांत के दर्द या मुंह की बीमारी को अभी तक सामान्य बीमारी मानकर कई लोग डेंटिस्ट के पास जाना पसंद नहीं करते। उन्हें लगता है कि दर्द कुछ दिनों में कम हो जाएगा। ऐसे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि दांत में लगातार दर्द बने रहना एंजाइना पेक्टोरिस (हार्ट अटैक) के लक्ष्ण हो सकते हैं। वहीं, पायरिया का लंबे समय तक इलाज नहीं कराने पर भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि दांतों में दर्द अटैक में अलार्म की तरह काम करता है। 30 से 40 प्रतिशत मामलों में मरीज इस अलार्म को समझ ही नहीं पाते। एक्सपर्ट का कहना है कि रक्त धमनियों में ऑक्सीजन युक्त रक्त की कमी के कारण संकुचन होता है, इसके कारण बाएं जबड़े के निचले हिस्से में दर्द होने लगता है।
तीन गुना तक बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा
एन्डोडोन्टिस्ट डॉ. प्रशांत त्रिपाठी के अनुसार हार्ट पेशेंट को निचली दाढ़ से कान की तरफ और कंधे व बाएं हाथ की तरफ दर्द होता है। पेरियोडॉन्टल की स्थित में हार्ट अटैक की संभावना तीन गुना तक बढ़ जाती है। मसूड़ों में आने वाली सूजन बैक्टरिया से हार्ट की धमनियों तक पहुंच जाती। मसूड़ों में रहने वाले बेक्टिरिया हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। यदि मरीज को डायबिटिज है तो इसकी संभावना चार गुना तक है। दांतों और मसूड़ों पर जमे हुए प्लाक में बैक्टिरिया रक्त प्रवाह के साथ हृदय की धमनियों में पहुंचकर उसे संक्रमित करने के साथ ही उसके लचीलेपन को समाप्त कर देते हैं। जिसे ऐथरोस्क्लरोसिस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज जब तक दर्द को समझ पाता है उसे स्ट्रोक आने की संभावना 70 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
इन बातों का रखें ख्याल
1. दाढ़ के दर्द को नजरअंदाज करने की बजाए अनुभवी दंत चिकित्सक से परामर्श लें।
2. मसूड़ों के रोगों से बचाव के साथ डाइबिटीज व ब्लड प्रेशर को सामान्य रखें।
3. फास्ट फूड से दूरी बनाए।
4. हर छह माह में दंत चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।
जबड़ों में उठने वाले दर्द को नजरअंदाज कर घातक हो सकता है। मसूड़ों में सूजन आने पर बेक्टिरिया धमनियों के रास्ते हार्ट तक पहुंच जाता है। इसी तरह पायरिया का बेक्टेरिया हार्ट की संभावना को तीन गुना तक बढ़ा सकता है। मेडिकल हिस्ट्री या अन्य कारण से यदि मरीज को लगता है कि उसे हार्ट की समस्या हो सकता है तो उसे स्पेशलिस्ट डेंटल सर्जन की मदद लेना चाहिए।
डॉ. प्रशांत त्रिपाठी, एमडीएस, एन्डोडोन्टिस्ट
लोग अक्सर जबड़े के दर्द को नजरअंदाज कर सकते हैं। वे इसे सामान्य लक्षण मानकर डेंटिस्ट के पास पहुंच जाते हैं। कई डेंटिस्ट इसे समझ नहीं पाते। मेडिकल भाषा में इस तरह के दर्द को रिफर्ड पैन कहा जाता है। जब तक वे इसे समझ पाते हैं कि बहुत देर हो चुकी होती है। यदि लगातार जबड़े में दर्द बना रहे तो डेंटिस्ट के साथ हार्ट कॉर्डियोलॉजिस्ट की मदद लेना चाहिए।
डॉ. आदर्श वाजपेयी, हार्ट स्पेशलिस्ट
पायरिया के कारण खराब खून पेट में जाता है। 100 केस में चालीस मामलों में हार्ट अटैक का खतरा हो जाता है। इससे हार्ट में खून की सप्लाई भी कम हो जाती है। अभी मरीज इसे गंभीरता से नहीं लेते। इसके लिए माउथ अवेयरनेस प्रोग्राम चलाए जाने की जरूरत है।
अंशुल राय, एसोसिएट प्रोफेसर, एम्स
Updated on:
13 Dec 2019 04:25 pm
Published on:
13 Dec 2019 01:10 pm
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