
अंग्रेजी नहीं
भोपाल। हिन्दी माध्यम के प्रतिभागी भी यूपीएससी क्रेक कर सकते हैं, लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा अंग्रेजी नहीं बल्कि लो-कॉन्फिडेंस बनता है। हिन्दी माध्यम से पढ़ाई करने वाले प्रतिभागी पहले ही ये सोच बैठते हैं कि उन्हें फर्राटेदार अंग्रेजी नहीं आती तो वे कभी सलेक्ट हो ही नहीं पाएंगे।
इसके पीछे उनके पास तर्क होता है कि एग्जाम की तैयारी के लिए उनके पास पर्याप्त मटेरियल नहीं है। लेकिन पूरा सच नहीं है। यदि आपके पास उपलब्ध मटेरियल से अनुशासन बनाकर तैयारी की जाए तो भारतीय सेवा की मनचाही सर्विस में जाने से कोई नहीं रोक सकता। ये कहना है यूपीएससी-2017 में ऑल इंडिया 146 रैंक हासिल कर हिन्दी माध्यम में टॉप करने वाले अनिरुद्ध कुमार का। वे सोमवार को समन्वय भवन में आयोजित आलोक प्रतिज्ञा सांसद शिक्षा योजना में शामिल हुए।
इस योजना में 100 युवाओं को यूपीएससी/पीएससी की नि:शुल्क कोचिंग दिल्ली और भोपाल में दी जाएगी। इस योजना का शुभारंभ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने किया।
अनिरुद्ध का कहना है कि इस एग्जाम से संभवत: मुझे आईपीएस अवार्ड होगा। इस एग्जाम की मैंने 2012 में तैयारी शुरू की। 2012 और 2013 में इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन सिलेक्ट नहीं हो पाया। इसके बाद बिहार लौट गया और पीसीएस देने लगा।
वहां तीन साल तक तैयारी की और सिलेक्ट भी हो गया।मुझे लगा कि मैं इसके लिए नहीं बना हूं। मैंने फिर यूपीएससी का एग्जाम दिया। 2016 में रिजर्व लिस्ट तक पहुंचा तो मेरा कॉन्फिडेंस बढ़ गया। कार्यक्रम में आए युवाओं से उन्होंने कहा कि यूपीएससी के लिए थोड़ी अंग्रेजी आना तो बहुत जरूरी है। क्योंकि अंग्रेजी का एक पेपर भी होता है, जिसे क्वालिफाई करना अनिवार्य होता है।
छोटे-छोटे टारगेट सेट करें
अक्सर प्रतिभागी एक ही दिन में पूरी तैयारी कर लेना चाहते हैं। वे इतने बड़े टारगेट सेट करते हैं, जो कभी पूरे ही नहीं हो सकते। इसलिए जरूरी है कि हर दिन, सप्ताह, माह का टारगेट सेट करें। पढ़ाई के घंटे तय करने की बजाए टॉपिक्स पर फोकस करें। भाषा कोई भी हो, वो अंतर पैदा नहीं करती। बशर्ते आपका प्रदर्शन प्रभावी हो। पढ़ाई में विजन के साथ इनोवेशन भी जरूरी है।
एग्जाम के लिए फेक्ट डेटा फिगर, डायग्राम, कैचिंग वडर्स, लेखन में इनोवेशन, टेस्ट सीरिज फॉलो करें। एग्जाम का डर लिख-लिख कर ही दूर किया जा सकता है। एग्जाम में लिखने के लिए अपनी शैली विकसित करें। शैली ऐसी हो जो एग्जामिनर को प्रभावित कर सके। यही नियम इंटरव्यू पर भी लागू होता है। यही कारण है कि मुझे पहली बार 128 दूसरी बार 154 और तीसरी बार 184 माक्र्स मिले।
हमेशा टॉपर्स के वीडियो देखें
टॉपर्स आपको हमेशा मोटिवेट करेंगे। ऐसे में आप यू-ट्यूब पर उनके वीडियो भी देखें, उनके सक्सेस टिप्स से हमेशा कुछ न कुछ सीखने को मिलेगा। पुराने पेपर का लगातार एनालिसिस करें। यदि अंग्रेजी न्यूज पेपर नहीं पढ़ सकते तो यू-ट्यूब पर ऐसे कई चैनल हैं, जिसमें हर दिन सारे अंग्रेजी पेपर्स का एनालिसिस हिन्दी में बताया जाता है।
यदि विजेता बनना है तो हमेशा दो फार्मुले अपना पहला असफलता के अ को कभी आसपास भी न फटकने दें। दूसरा खुद पर ट्रस्ट करें। क्योंकि ट्रस्ट से टी निकलते पर सिर्फ रस्ट यानी जंग बचता है। खुद पर किया गया विश्वास कभी असफल नहीं होने देता।
Published on:
19 Jun 2018 11:27 am
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