
सिकल सेल
भोपाल। सिकल सेल से पीडि़त बच्चों के अभिभावकों के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाना बहुत ही बुरे अनुभवों में से एक होता है। लेकिन उन्हें कभी भी अस्पताल पहुंचने में लापरवाही नहीं बरतना चाहिए क्योंकि ऐसा करना बच्चे के लिए जानलेवा हो सकता है।
सिकल सेल की वजह से बच्चों के खून में मौजूद सेल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं जिससे शरीर के अंगों में ऑक्सीजन और न्यूट्रीएंट्स पहुंचाने का काम ठीक तरह से नहीं हो पाता। जब ब्लड सेल ज्यादा क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो वे पूरी तरह से काम करना बंद कर देते हैं और ब्लड सप्लाई में रूकावट डालते हैं जिससे पीडि़त बच्चे के शरीर में तेज दर्द आरभ हो जाता है। तेज बुखार, शरीर में कमजोरी, तेज सिरदर्द, एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखना अथवा प्रायवेट पाट्र्स, खासकर लड़कों के, में दर्द होना आदि सिकल सेल की ओर इशारा करते हैं ।
यह बात शहर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके यादव ने विश्व सिकल सेल दिवस की पूर्व संध्या पर अभिभावकों के लिए आयोजित एक कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा कि मौसम के बदलाव, मलेरिया अथवा ऐनेमिया की स्थिति में इस संक्रमण के लक्षण उभर कर आते हैं।
यदि पीडि़त बच्चे को पेन किलर व पानी पिलाने के दो घण्टों बाद भी आराम न मिले तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। पानी इस बीमारी से होने वाले दर्द से निजात दिलाने की सबसे कारगर दवा है। डॉ. यादव ने कहा कि तेज बुखार, शरीर में कमजोरी, तेज सिरदर्द, एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखना अथवा प्रायवेट पाट्र्स, खासकर लड़कों के, में दर्द होना आदि सिकल सेल की ओर इशारा करते हैं जिसकी तुरंत जांच कराना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सिकल सेल से पीडि़त महिलाओं से उनको होने वाले बच्चों में सिकल सेल होने की संभावना 50 फीसदी तक होती है। मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में से एक है जहां सिकल सेल पीडि़तों की संख्या ज्यादा है।
Published on:
19 Jun 2018 10:29 am

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