मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल सभी सरकारी और निजी डॉक्टरों के लिए एमसीआई द्वारा जारी प्रिस्क्रिप्शन फॉर्मेट जारी कर भूल गई। इस फॉर्मेट में डॉक्टर के नाम रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ मरीज का नाम, उसका मर्ज, दवाएं, दवा की क्षमता, उसे लेने संबंधी निर्देश और कितने दिन तक लेना है, यह लिखना जरूरी है। लेकिन सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर दवाओं के अलावा कुछ भी नहीं लिख रहे हैं। दवाएं और इंस्ट्रक्शन भी इतनी घसीटा राइटिंग में लिखे जा रहे हैं कि मरीजों को समझ नहीं आता। सरकारी अस्पतालों में दवाएं लेने के लिए भी लंबी लाइन लगती है। दवा वितरण करने वाले के पास भी इतना समय नहीं होता कि वह बता सके कि दवा कितने टाइम और कितनी मात्रा में लेना है। इससे अधिकांश मरीज हर दवा कम से कम दो टाइम लेते रहते हैं। एेसे में कुछ दवाएं नुकसान भी कर सकती हैं।