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एक ऐसा डॉक्टर जो बिखेर रहा है बच्चों के चेहरों पर मुस्कान, आखिर कैसे जानिए वजह

मध्यप्रदेश में एक ऐसा डॉक्टर भी है जो अस्पताल में इलाज के बाद ग्रामीण इलाकों में बच्चों का इलाज मुफ्त करने के लिए घूमता है। अब तक कई बच्चों को दिलाई राहत, उनके चेहरे पर लाई मुस्कान। जानिए कौन है यह डॉक्टर...  

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भोपाल

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Puja Roy

Feb 06, 2024

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सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में पदस्थ एक डॉक्टर इन दिनों चर्चा में है। डॉक्टर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में काम करने के बाद शहर की आंगनबाड़ियों में भी बच्चों का इलाज करने जाते हैं। इनमें कई गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों का इलाज करने के लिए उनके घर तक भी जाने से डॉक्टर परहेज नहीं करते हैं। बीमारी अधिक गंभीर होने पर बच्चों को राष्ट्रीय बाल कार्यक्रम में पंजीकृत कर निःशुल्क जांच एवं उपचार के लिए अस्पताल भी लाते हैं और उन्हें पूरा इलाज उपलब्ध कराने का जिम्मा उठाते हैं। अब तक ये डॉक्टर गंभीर बीमारियों से पीड़ित 300 से ज्यादा बच्चों का इलाज कर चुके हैं। बीमारी खत्म कर बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए शुरू किए गए इस अभियान को डॉक्टर ने मुस्कान अभियान का नाम दिया है।

अंकित जैन बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम की शुरुआत जनवरी 2021 में की थी। अंकित सागर के आसपास के ग्रामीण इलाकों की आंगनबाड़ियों के बच्चों का मुफ्त इलाज करते हैं। लेकिन जब उन्हें आंगनबाड़ियों से गंभीर रूप से बीमार बच्चों की जानकारी मिलती है तो इलाज करने ये उनके घर पर भी चले जाते हैं।

अब तक लगाए 154 निशुल्क बाल शिविर
डॉ. अंकित ने बच्चों की देखभाल के लिए अब 154 निःशुल्क बाल स्वास्थ्य शिविर लगाए हैं। जिसमें बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर गंभीर बीमारियों तक के इलाज की सुविधा मुहैया कराई गई। डॉ. अंकित जैन अब तक निमोनिया फटे होठों, कम वजन, दिल में छेद, फ्लू बुखार, खांसी और विटामिन की कमी जैसी बीमारियों वाले बच्चों का इलाज कर रहे हैं।

भोपाल में इलाज के दौरान आया मदद का आयडिया
डॉ. अंकित जैन को ये प्रेरणा तब मिली थी जब वह 2015 में गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के बाल रोग विभाग में पीजी की पढ़ाई कर रहे थे। उस वक्त एक माता-पिता अपने घायल बच्चे को रात में अस्पताल लेके आए थे, बच्चे का पूरा शरीर नीला पड़ गया था। बच्चे के दिल में छेद था। बच्चे के माता पिता बीमार बच्चे का इलाज करने में असमर्थ थे। डॉक्टरों ने इस मासूम बच्चे का इलाज किया। उसी वक्त अंकित को ऐसे बच्चों केे इलाज का ख्याल आया और उसके बाद से वह लगातार ऐसेे बच्चों का इलाज कर रहे हैं।