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राजधानी में कुत्ते ही नहीं मवेशी, चूहों ने भी लोगों का जीना कर दिया मुहाल

नगर निगम के जिम्मेदार जनता की परेशानी नहीं कर पा रहे दूर, कागजों में लाखों खर्च हो रहे सो अलग

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भोपाल. राजधानी में कुत्ते ही नहीं मवेशी, चूहों ने भी लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। सड़क पर बैठे मवेशी वाहन चालकों को हमेशा दुर्घटना की जद में रखते हैं। दिन व रात के समय गलियों में झुंड बनाकर घूमते आवारा कुत्ते मासूमों के साथ बुजुर्ग-महिलाओं और वाहन चालकों पर हमला कर उन्हें जख्मी कर रहे हैं। हैरत है कि इन्हें शहर से बाहर करने का जिम्मा उठाने वाले नगर निगम के अफसर सिर्फ कागजी कार्रवाई में व्यस्त हैंं।
नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 में स्पष्ट है कि निगम सीमा में मवेशी, सुअर, कुत्ते पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं। इन्हें शहर के बाहर किया जाए, ताकि शहरी व्यवस्था में बाधा न बने। एनजीटी से लेकर कोर्ट और कई स्तरों पर लगातार आदेश-निर्देश जारी हुए कि इन्हें बाहर किया जाए। अफसरों ने इसके लिए कागजी घोड़े भी दौड़ाए, लेकिन नजीता अब तक सिफर ही है।

वायरल, सांस, चमड़ी से जुड़ी बीमारियों की वजह
कुत्ते- शहर में 25 हजार आवारा कुत्ते हैं।
उपाय किया- 2014 से सालाना करीब डेढ़ करोड़ रुपए में नसबंदी का ठेका दिया हुआ है।
ये हैं स्थिति- एजेंसी सालाना 19 हजार कुत्तों की नसबंदी का दावा करती है। चार साल में करीब 76 हजार कुत्तों की नसबंदी हो जाना चाहिए, फिर भी 25 हजार कुत्ते बिना नसबंदी के कैसे घूम रहे हैं?
कैसे खतरनाक- निगम के कर्मचारी एक क्षेत्र का कुत्ता दूसरे में छोड़ रहे, इससे कुत्ते आक्रामक हो रहे। जान का खतरा समझकर इंसानों पर हमले कर रहे हैं।

मवेशी- 850 डेयरियां हैं। इनमें 25 हजार मवेशी हैं, जो दूध नहीं देते या फिर नर हंै।
उपाय किया- जनवरी 2017 में डेयरियों का सर्वे किया।
ये हैं स्थिति- कोलार रोड से लेकर चूनाभट्टी, शाहपुरा, अरेरा कॉलोनी, एमपी नगर, होशंगाबाद रोड, पीएचक्यू रोड, पुराना शहर समेत तमाम क्षेत्रों में डेरा रहता है।
ऐसे खतरनाक- गंदगी फैलाने में इनका बड़ा योगदान है। सड़क पर दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। कई लोगों की जान जा चुकी है।

शहर को कैटल फ्री बनाने के साथ डॉग, सुअरों पर नियंत्रण के लिए हम गंभीर हैं। ठोस रणनीति बनाई जा रही है,जल्द ही असर दिखेगा।
अविनाश लवानिया, निगमायुक्त
ऐसी बीमारियों के मामले आ रहे हैं जो कुत्तों व मवेशियों से होती हैं। वायरल व सांस, चमड़ी से जुड़ी बीमारियों के भी ये वाहक हंै।
डॉ. धीरज शुक्ला, फिजिशियन

शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते हैं जैन टॉवर के रहवासी
भोपाल. नेहरू नगर चौराहे से सटे जैन टॉवर में रहने वाले परिवार इन दिनों शाम होते ही फ्लैट्स में कैद हो जाते हैं। मुख्य मार्ग पर मौजूद अंग्रेजी शराब दुकान और मांसाहार सामग्री परोसने वाली होटलों की वजह से यहां आवारा कुत्तों का ठिकाना है। अंधेरा होते ही कुत्तों का झुंड रहवासियों की ओर लपकता है। रात भर आपस में लडऩे-झगडऩे, भौंकने के बाद कुत्ते सुबह गंदगी मचाकर भाग जाते हैं। लोगों ने निगम कॉल सेंटर में शिकायतें दर्ज करवाई, लेकिन बीएमसी डॉग कैचर्स की टीम औपचारिकता कर लौट जाती है।