
सावधान! मौसन पूर्वानुमान पर न करें भरोसा, विश्वसनीयता की कोई गारंटी नहीं, ये रहा प्रूफ..!
भोपाल। भोपाल और लखनऊ के मौसम विज्ञान केन्द्र का पूर्वानुमान अब विश्वास के लायक नहीं रहा। पिछले एक साल में इसकी विश्वसनीयता काफी कम हो गई है। ये बातें शनिवार को राजधानी आए मौसम विज्ञान केन्द्र नागपुर के डीडीजीएम जेआर प्रसाद ने कही। उन्होंने पत्रिका से बातचीत में कहा कि मौसम के पूर्वानुमान और उसमें अचानक आए बदलावों की जानकारी देने के लिए देशभर में लगाए गए डॉप्लर रडार में से सबसे खराब परफॉर्मेंस भोपाल का ही है। लगभग एक माह से यह फिर से बंद पड़ा है। लगभग आठ माह से बंद पड़ी मौसम विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर उन्होंने कहा कि अधिकारियों को समय रहते सचेत होना था।
कभी बैट्री डिस्चार्ज तो कभी एसी खराब
सूत्रों के अनुसार वर्तमान में डॉप्लर रडार केंद्र के एसी खराब हैं, जिसके चलते यह काम नहीं कर रहा है। इससे पहले यहां बैट्रियों के खराब होने की शिकायत आई थी। तब भी यह लंबे समय तक बंद रहा था।
10 करोड़ की लागत से तैयार हुई बिल्डिंग
डॉप्लर रडार को संचालित करने के लिए लगभग 10 करोड़ की लागत से बिल्डिंग का निर्माण किया गया है। 2007 में शुरू हुआ भवन निर्माण का कार्य 2014 में पूरा हो पाया। 2015 से रडार ने काम करना शुरू किया।
निजी संस्थाओं से भी मिलने लगी है चुनौती
प्रसाद ने कहा कि निजी संस्थाएं भी अब पूर्वानुमान जारी कर रही हैं। लेकिन उनके विभाग द्वारा जारी किए गए पूर्वानुमान ज्यादा विश्वसनीय हंै। वैश्विक स्तर पर इसके लिए मौसम विभाग ने कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से संपर्क कर रखा है।
Published on:
20 May 2018 05:01 pm
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