
कुरीतियों और कुंठाओं पर प्रहार
भोपाल. शहीद भवन में सोमवार को नाटक मैला आंचल का मंचन किया गया। नाटक की कहानी फणीश्वरनाथ रेणु लिखित उपन्यास पर बेस्ड है। इसका निर्देशन बालेंद्र सिंह बालू ने किया। संगीत मॉरिस लाजरस का रहा। ढाई घंटे के इस नाटक में समाज में व्याप्त कुरीतियां और प्रेम प्रसंग सहित विविध पहलुओं को दिखाया गया। ये एक ऐसे डॉक्टर की कहानी है जो गांव में सेवा के लिए जाता है, लेकिन गांव वाले ही उसे कुरीतियों के नाम पर उसे प्रताडि़त करते हैं और प्रेम करने पर जेल तक भिजवा देते हैं।
तहसीलदार की बेटी से हो जाता है प्रेम
नाटक की कहानी गांव के एक युवा डॉक्टर की है। वह अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद रिसर्च के चलते एक पिछड़े हुए गांव को कार्य क्षेत्र बनाता है। वह जब गांव में पहुंचता है तो उसे पता चलता हैकि यहां कई तरह की कुरीतियां फैली हुई है। जमीन विवाद, मठ विवाद, बीमारी और राजनीति जैसे विषय हमेशा यहां छाए रहते हैं। गांव वाले इन मुद्दों में उलझने के कारण जैसा विकास होना चाहिए, उससे पीछे रह जाते हैं। डॉक्टर पूरी लगन से गांव वालों की सेवा करता है, सभी का इलाज करता है। एक दिन डॉक्टर के पास तहसीलदार की बेटी इलाज के लिए आती है जिसे देखकर डॉक्टर को प्रेम हो जाता है। इसी बीच होली का त्योहार आता है जिसे सभी मिलकर सेलिब्रेट करते हैं। डॉक्टर और तहसीलदार की बेटी के बीच नजदीकियां बढ़ती हैं और तहसीलदार की बेटी गर्भवती हो जाती है।
चिट्ठी में होती है विरह की कहानी
तहसीलदार को जब प्रेम प्रसंग का पता चलता है तो वह आग बबूला हो उठता है। वह अपनी पत्नी से कहता है कि वह बेटी को जहर देकर मार दे। लेकिन उसकी पत्नी अपनी बेटी को जहर नहीं देती। गांव वाले डॉक्टर को कम्यूनिस्ट कहकर जेल करवा देते हैं। डॉक्टर से बिछडऩे के बाद तहसीलदार की बेटी चिठ्ठी लिखती है, जिसे डॉक्टर का नौकर जेल में देने जाता है। चिठ्ठी में प्रेमिका के विरह की कहानी होती है। नाटक के अंत में डॉक्टर को उसकी दोस्त ममता जेल से बाहर निकलवाती है। जब डॉक्टर घर लौटता है तो वह पिता बन चुका होता है और तहसीलदार भी उसे अपना लेता है।
Published on:
24 Sept 2019 03:00 am
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