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चरवाहे को लकड़ी नहीं काटने देता भूत, राजा बना देता है जंगल का संरक्षक, ऐसी है इस नाटक की कहानी

भाण्ड पाथेर शैली में शिकारगाह पाथेर नाटक का मंचन

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Drama Shikargah Pather staged in Bhopal

चरवाहे को लकड़ी नहीं काटने देता भूत, राजा बना देता है जंगल का संरक्षक, ऐसी है इस नाटक की कहानी

भोपाल. मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में अभिनयन शृंखला में शुक्रवार को भाण्ड पाथेर शैली में शिकारगाह पाथेर का मंचन किया गया। इसका निर्देशन इम्तियाज अहमद बगथ ने किया है। इस नाट्य प्रस्तुति की शुरुआत जंगल के जनजीवन से होती है, जहां एक लकड़हारा लकड़ी काटने जाता है, लेकिन उसे जंगल में रहने वाला एक भूत लकड़ी काटने नहीं देता और वहां से भगा देता है। कुछ समय बाद जब एक चरवाहा अपने जानवरों को लेकर जंगल में जाता है तो चलते-चलते वह देखता है कि एक शेर हिरण का शिकार करने के लिए उसके पीछे तेजी से भाग रहा है। शेर के आंखों से ओझल हो जाने के बाद वह अपने जानवरों को फिर चराने लगता है। इसी दौरान उसे एक व्यक्ति मिलता है और शेर के बारे में पूछताछ करने लगता है। उसकी बातों से चरवाहा समझ जाता है कि यह तो शिकारी है जो शेर का शिकार करने के लिए जानकारी ले रहा है।

नहीं कर पाता शिकार
उसी समय वहां उस राज्य के राजा आ जाते हैं। इस दौरान राजा को देख शिकारी शिकार नहीं कर पाता। ऐसे में राजा चरवाहे को जंगली जानवरों और जंगल का संरक्षण करने के लिए नियुक्त कर देते हैं और इसी के साथ भाण्ड पाथेर शैली में नाट्य शिकारगाह पाथेर का अंत होता है। इस नाट्य प्रस्तुति में कलाकारों ने अपने कलात्मक अभिनय कौशल से जंगल के जनजीवन का संरक्षण करने की प्रेरणा दर्शकों को दी। इस प्रस्तुति की समय सीमा लगभग 45 मिनट रही। इस दौरान कलाकारों ने अपने अभिनय कौशल से सभागार में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान ढोल पर अब्दुल सलाम, शहनाई पर अब्दुल गनी और घुलम पर अहमद बगथ और नगाड़े पर अब्दुल रशीद बगथ ने सहयोग किया।