
भोपाल. गणित एक ऐसा विषय है, जिससे ज्यादातर विद्यार्थी दूर भागते हैं। ऐसे में यदि उन्हें विषय चुनने की आजादी मिल जाए तो कहना ही क्या। यह जानकर हैरानी होगी कि हर साल मध्य प्रदेश के 5 लाख से अधिक विद्यार्थी 10 वीं कक्षा में गणित छोड़ देते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार किसी विश्वविद्यालय, कॉलेज की प्रवेश परीक्षा हो या फिर सरकारी नौकरी की प्रतियोगी परीक्षा, इन सभी में गणित के प्रश्नजरूर पूछे जाते हैं। बैंकिंग से लेकर एसएससी, सीजीएल, सी-टेट, सीडीएस, एयरफोर्स और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बड़ी संया में गणित के प्रश्न होते हैं। इन परीक्षाओं में सफलता तभी मिलती है जब गणित में मजबूत पकड़ हो।
सरकारी नौकरियों की ज्यादातर परीक्षाओं में 10वीं-12वीं तक के गणित के प्रश्न पूछे जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि 10वीं-12वीं के गणित पर फोक हो। यदि इन कक्षाओं के गणित को अच्छी तरह समझ और सुलझा लिया, तो आगे के रास्ते खुल जाते हैं। आमतौर पर इन कक्षाओं में पढ़ने के दौरान तो सवाल हल करना आसान होता है, लेकिन बाद में परीक्षा की तैयारी करते हैं, तो इन्हीं प्रश्नों को हल करना कठिन लगता है।
इसलिए योजना
सरकार की लाख कोशिशों के बाद पिछले एक दशक से 10वीं का रिजल्ट 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार नहीं कर पा रहा था। प्रतिशत बढ़ाने 2018 बेस्ट ऑफ फाइव पद्वति लागू की गयी। इससे रिजल्ट का प्रतिशत तो बढ़ा, लेकिन बड़ी संख्या में बच्चों ने गणित विषय छोड़ दिया। विभाग ने इस योजना को बंद करने का प्रस्ताव दिया है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं की परीक्षाओं में हर साल दस लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होते हैं। करीब 50 प्रतिशत बच्चे ऐसे होते हैं जो गणित विषय छोड़ देते हैं या गणित में सबसे कम नंबर आते हैं। सरकारी की बेस्ट ऑफ फाइव योजना के तहत कम नंबर आने या विषय की परीक्षा न देने पर अंकसूची में इस विषय के अंक शामिल नहीं किए जाते है।
Published on:
22 Dec 2023, 5:27 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.