इस समस्या के समाधान के लिए देर शाम एसोसिएशन के पदाधिकारी भोपाल के माइनिंग अधिकारी से मिले, लेकिन उन्हें अभी सिर्फ कार्रवाई करने का आश्वासन ही मिला है। राजधानी में जिस तेजी से रेत का अवैध परिवहन हो रहा है वो सीधे सोची-समझी प्लानिंग की ओर इशारा करता है। अब इसमें किस की मिलीभगत है वो तो सरकारी तंत्र ही जाने, लेकिन अब तब की सबसे ज्यादा ओवरलोड रेत वो भी बिना रॉयल्टी की इन्हीं दिनों आ रही है। इसके लिए भोपाल, रासयेन, सीहोर, औबेदुल्लागंज और होशंगाबाद की सेंड ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन एक जुट होकर खुद की हाईवे पर ओवरलोडिंग रोकने उतर गई। सुबह छह बजे पहले रायसेन में पडऩे वाले बरखेड़ा में 35 से ज्यादा डंपरों को रोक कर माइनिंग अधिकारियों को फोन किया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाए। इसके बाद भोपाल के 11 मील पर 6 डंपरों को रोका, लेकिन यहां भी अधिकारियों ने कह दिया कि वे मीटिंग में व्यस्त हैं।