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भोपाल। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अश्विन मास की पूर्णिमा को दशहरा मनाया जाता है, जो आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर महीने के दौरान आती है। भगवान राम ने 10 दिनों तक अपनी पत्नी सीता को बचाने के लिए रावण से युद्घ किया जिसमें वह पराजित हुआ। भगवान राम की यही जीत बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। ऐसी एक नहीं, बल्कि कई कहानियां हैं, जिनके मुताबिक देशभर में दशहरा पर्व अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। आप भी जानें ये दशहरा सेलेब्रेशन की ये रोचक कहानियां...
दुर्गा पूजा की समाप्ति का प्रतीक
* दुर्गा पूजा के नौ दिन के समारोह की समाप्ति का प्रतीक है दशहरा।
* इस पर्व को भी बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में जाना जाता है।
* देवी दुर्गा ने लोगों की रक्षा के लिए महिषासुर नामक एक राक्षस का वध किया था, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और देवी चामुंडेश्वरी की पूजा की जाती है।
* जिन्होंने लोगों की रक्षा के लिए महिषासुर और असुरों की सेना को चामुंडा की पहाडिय़ों में युद्ध कर पराजित किया था।
सीता को बचाने राम ने रावण से किया था युद्ध
रामायण के मुताबिक मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने पत्नी सीता को रावण के चंगुल से बचाने के लिए रावण से युद्ध किया था। रावण का वध कर उन्होंने इस युद्ध में विजय प्राप्त की थी। तब से आज तक बुराई पर अच्छाई की जीत की ये कहानी हर साल दशहरे के रूप में मनाई जाती है।
महाभारत में मिलते हैं ये प्रमाण
महाभारत में दशहरा मनाए जाने के पीछे पांडवों के वनवास की कहानी है। माना जाता है कि पांडवों ने बारह साल वनवासी जीवन जिया। वनवास के इस जीवनकाल की शुुरुआत करने से पहले उन्होंने जंगल जिस स्थान को रहने के लिए चुना था। वहीं एक शामी वृक्ष था। इस वृक्ष के नीचे उन्होंने अपने सभी हथियार छिपा दिए थे। इसके बाद वनवासी जीवन जीना शुरू किया था। वनवास काल के इन १२ सालों में वे हर रोज इस पेड़ और छिपाए गए हथियारों की पूजा करते रहे। वनवास के १२ साल पूरे होने के बाद पांडवों ने वृक्ष की पूजा कर हथियारों को फिर से निकाला और अपने पास रखना शुरू किया। तब से आज तक कई परिवारों में दशहरा के दिन हथियारों, लोहे की चीजों आदि से निर्मित वस्तुओं की पूजा एक परम्परा बनी हुई है।
जानें कहां कैसे मनाया जाता है दशहरा
राजधानी भोपाल में न केवल रामायण पर आधारित कहानी के अनुसार बुराई पर अच्छाई की जीत के जश्न में रावण का पुतला दहन कर दशहरा मनाया जाता है, बल्कि महाभारत में मिले प्रमाणों के आधार पर भी दशहरा मनाया जाता है। यही कारण है कि हर साल दशहरा के दिन भेल में पूजा का आयोजन किया जाता है। जहां लोहे से निर्मित चीजों को रखकर उनकी पूजा की जाती है। पूजा के इस कार्यक्रम में भेल कर्मचारियों के साथ ही उनके परिवारों को भी आमंत्रित किया जाता है।
* सुबह इस कार्यक्रम के बाद शाम को भेल के दशहरा मैदान में भेल की ओर स रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
* कला और संस्कृति के रूप में अपना अनूठा मुकाम पाने वाले भोपाल में मप्र के ही नहीं बल्कि बंगाली लोगों के साथ ही महाराष्ट्रीयन और साउथ इंडियन लोग भी अपनी परम्परा के मुताबिक नवरात्रि और दशहरा पर विभिन्न आयोजन करते हैं।
* खासतौर पर भेल क्षेत्र में स्थित कालीबाड़ी मंदिर बंगाली समाज के कार्यक्रमों से झिलमिला उठता है। नवरात्रि के नौ दिन यहां विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। समां ऐसा बंधता है कि यहां से गुजरने वाले भी इन कार्यक्रमों में शामिल हो ही जाते हैं।
निवारी में कमल पर विराजती हैं दुर्गा मां
सागर जिले के निवारी गांव में हर साल बेतवा नदी के 15 फिट गहरे पानी में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। 25 साल से जारी इस परम्परा को दशहरा के दिन इस प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाता है।
ये भी जानें
* ज्यादातर राज्यों में दशहरा के दिन प्रसिद्ध कोलू या रावण के पुतले का दहन किया जाता है।
* बंगाल में दुर्गा पूजा के नौ दिन के समारोह के बाद 10वें दिन मां दुर्गा का पानी में विसर्जन करने का चलन है।
* महाराष्ट्र में सिमॉल्लंघन नाम से विशेष अनुष्ठान आयोजित किया जाता है।
* महाराष्ट्र में दशहरा वाले दिन एक गांव की सीमा पार कर दूसरे गांवों में प्रवेश की परम्परा है। इसके पीछे मान्यता है कि प्राचीन काल में राजाओं ने अपने देश की सीमाओं को पार कर अपने दुश्मनों को धूल चाटने को मजबूर कर दिया था। तब इस परम्परा के मुताबिक आप्टा पेड़ के पत्ते इकट्ठा कर उन्हे दोस्तों, रिश्ते-नातेदारों और मिलने-जुलने वालों को दिए जाते हैं। इन पत्तों का वितरण सोने के प्रतीक के रूप में किया जाता है। एक दूसरे को बधाई संदेश देकर खुशियों का इजहार किया जाता है।
* तमिलनाडू और केरला में दशहरा को विजयदशमीं के रूप में मनाया जाता है। इन राज्यों में विजयदशमीं के दिन को नए काम करने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। यहां स्कूलों में एडमिशन का समय भी यही है। यही नहीं नन्हें बच्चों को अक्षरअभ्यास का पहला दिन भी यही होता है।
* नॉर्थ इंडिया में नवरात्रि की शुरुआत से रामलीला का आयोजन किया जाता है। यह रामलीला राम और सीता के जीवन से शुरु होकर रावण द्वारा सीता का अपहरण और सीता को बचाने के लिए किया गया रावण से युद्ध तथा इस युद्ध में राम की विजय को दर्शाया जाता है। 10वें दिन राम की विजय और रावण के अंत को पुतला दहन के रूप में आयोजित किया जाता है।
इस साल 30 सितंबर को दशहरा
इस साल 2017 में 30 सितंबर शनिवार को पूरे भारत में दशहरा मनाया जाएगा। दशमीं तिथि की शुरुआत 29 सितंबर की रात 11 बजक र 49 मिनट से शुरू हो जाएगी। यह तिथि 1 अक्टूबर की रात 1 बजकर 35 मिनट तक रहेगी।
* विजय मुहूर्त समय 2.08 बजे से दोपहर 2.55 बजे तक है।
* अपराह्न पूजा समय 1.21 से 3.42 बजे तक है।
Updated on:
26 Sept 2017 04:47 pm
Published on:
26 Sept 2017 03:36 pm
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