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ई-टेंडर घोटाला पहुंच सकता है 80 हजार करोड़ तक, 7 साल के सभी टेंडरों की होगी जांच

एनआईसी से काम छीनकर निजी कंपनियों को क्यों और किस अफसर ने दिया इसकी भी होगी जांच एंटेरस के संचालकों से दिनभर हुई पूछताछ, बुला सकते हैं तीन अन्य को भी  

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e tender scam

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भोपाल. ई-टेंडर घोटाला 3 हजार करोड़ रुपए से बढकऱ 80 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। मंगलवार को इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कारपोरेशन के तत्कालीन एमडी मनीष रस्तोगी से पूछताछ के बाद ईओडब्ल्यू ने जांच का का दायरा बढ़ाकर 2012 तक के सभी विभागों के टेंडरों को जांच में शामिल कर लिया है। बताया जा रहा है कि 5 करोड़ रुपए से अधिक के सभी टेंडरों की जांच की जाएगी। जांच में बड़े-बड़े सभी विभागों द्वारा, जिन्होंने ई-टेंडर के जरिए प्रक्रिया अपनाई हैं, उन सभी विभागों के टेंडर और उनसे जुड़े अधिकारियों से पूछताछ की जा सकती है।

ईओडब्ल्यू ऑस्मो कंपनी के संचालकों और मनीष रस्तोगी के बयान के बाद जांच को नई दिशा में मोड़ दिया है। ई-टेंडर का काम शुरुआत में एनआईसी द्वारा किया जा रहा था, लेकिन बाद में अफसरों ने इसे निजी कंपनियों टीसीएस और एंटेरस सिस्टम्स प्रालि को दे दिया। इसकी भी जांच शुरु कर दी गई हैं कि किस अफसर के कार्यकाल में किन परिस्थितियों में निजी कंपनियों को ई-टेंडर का काम दिया है।

जल्द ही जिस अफसर के कार्यकाल में निजी कंपनियों को ई-टेंडर का काम दिया गया हैं, उनसे भी पूछताछ की जा सकती है। अब तक की जांच में ईओडब्ल्यू के अफसर दो महत्वपूर्ण निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। पहला तो जांच का दायरा बढ़ाने से टेंडर घोटाले की राशि 3 हजार करोड़ के बजाय 80 हजार करोड़ हो गई और दूसरा वह अफसर जिसने निजी कंपनियों को काम दिया है।

जो काम हो गया, उसकी भी हो सकती है जांच

ईओडब्ल्यू के डीजी केएन तिवारी ने बताया कि जांच का दायरा बढ़ाया गया है। इससे कुछ ऐसे मामले भी सामने आ सकते हैं, जिनमें टेंपरिंग की गई और काम पूरा भी कर लिया गया हो। भुगतान भी हो चुका हो। बताया जा रहा है कि ऐसे में यदि बहुत बड़ी रकम वाले टेंडर में धांधली सामने आती है तो उसकी भी जांच की जा सकती है।

इधर, दिनभर हुई पूछताछ

ई-टेंडर घोटाले में बंगलुरु की सॉफ्टवेयर कंपनी एंटेरस सिस्टम्स प्रालि के वाइस प्रेसिडेंट मनोहर एमएन व तीन अन्य पदाधिकारियों से ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने दिनभर पूछताछ की। पूछताछ में सबसे पहले कंपनी के सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी ली गई है। इसमें एक्सल शीट और वर्ड फाइल के जरिए ही टेंडर अपलोड करने का विकल्प क्यों रखा गया? ईओडब्ल्यू को अब तक की जांच में पता चला है कि एंटेरस कंपनी के सॉफ्टवेयर में आसानी से टेंपरिंग व सैंध लगाई जा सकती है।

इसके सॉफ्टवेयर में पीडीएफ फार्मेट में टेंडर अपलोड करने का विकल्प नहीं होने से एक्सल शीट व वर्ड फाइल में टेंडर अपलोड किया जाता था, जिसमें छेड़छाड़ की गई है। वहीं, एंटेरस कंपनी की तरफ से मप्र का काम देखने वाले सभी 6 पदाधिकारियों से बारी-बारी से पूछताछ की जाना है। बुधवार को तीनों से पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि तीनों से अभी और पूछताछ की जाना है। जप्त डाटा और ऑस्मो संचालकों के साथ लेन-देन और सांठगांठ को लेकर भी पूछताछ की गई है।