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‘धरती डोंगर’ समारोह : खाद्य विविधता एक्सचेंज में शामिल हुए आदिवासी

कुटकी, सावा, मंडिया और कांदा ने किया आकर्षित

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भोपाल। जो हमारे पास है वह तुम ले लो और जो तुम्हारे पास है वो हमें दे दो। गांधी भवन परिसर में बुधवार को 'धरती डोंगर' समारोह के दौरान यह लाइनें सुनने को मिलीं। निर्माण मंडला की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में जनजाति समुदाय के पुराखौती बीज और जंगल आधारित खाद्य सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही आदिवासी समुदायों ने अपनी अपनी खाने-पीने की वस्तुओं को यहां प्रदर्शित और एक्सचेंज भी किया। अनाज प्रदर्शनी में आदिवासी कला भी देखने को मिली। इसमें भगवान गणेश और शिव के चेहरों को बांस के सूप और अनाज के साथ तैयार किया गया था।

ताकि बनी रहे खाद्य सुरक्षा

कार्यक्रम के आयोजक नरेश बिश्वास ने बताया कि आम तौर पर आदिवासियों को करीब चालीस प्रतिशत फूड जंगल से मिलता है। इस फूड सिक्योरिटी के लिए डिंडोरी आदिवासियों के लिए सरकार ने एक खास पहल की है जिसको लेकर डिंडोरी में वन अधिकार कानून के तहत सेक्शन 31- ई में इन आदिवायिों के लिए एक प्रावधान है वह पूरा एक इलाका अपने हक के लिए मांग सकते हैं और डिंडोरी के बैगाओं ने मांगा और उन्हें यह मिला भी। जिसके दस्तावेज जंगल के हकदार के नाम से बनते हैं। इस तरह से अन्य आदिवासियों को भी जागृत करने के लिए हमने यह पहल की है।

विभिन्न राज्यों के आदिवासी हुए शामिल

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पहाड़ी कोरवा, मध्य प्रदेश के बैगा, भरिया, झारखंड के पहाडिय़ा आदि के साथ केरल और तमिलनाडु के आदिवासी भी यहां शामिल हुए। उन्होंने यहां पर अपने अनाज और खाने की वस्तुएं रखीं जिसमें खास किस्म के अनाज कुटकी, सावा, मंडिया, अरहार दाल, मक्का और कई हरी सब्जियों के साथ साथ कई तरह के कांदा फल शामिल रहे।

इसी के साथ तेल निकालने वाला खास बैग गौरवा पुरी भी यहां खास आकर्षण का केंद्र रहा। इसी के साथ तेल निकालने वाला खास बैग गौरवा पुरी भी यहां खास आकर्षण का केंद्र रहा।