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दाल उबाल कर खाओ, न आटा न तेल, राशन के लिए फिर बढ़ा संकट

- 5339 क्विंटल गेंहू और 1334 क्विंटल चावल का आवंटन निगम और खाद्य विभाग के अफसरों ने किया बांटने का दावा, जनता की थाली फिर भी खाली

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दाल उबाल कर खाओ, न आटा न तेल, राशन के लिए फिर बढ़ा संकट

दाल उबाल कर खाओ, न आटा न तेल, राशन के लिए फिर बढ़ा संकट

भोपाल. कोरोना संकट काल में दिहाड़ी मजदूर, बेघर, बेसहारा या वे लोग जो रोजाना कमा खाने वाले थे उनकी स्थिति खराब हो गई है। राशन दुकानों पर सिर्फ तुअर की दाल बची है, न आटा है न चावल। दुकानदार कह देते हैं कि कोटा नहीं आया। इधर खाद्य विभाग के अफसर किसी को एक किलो आटा देने से पहले कहते हैं संबंधित एसडीएम की परमिशन चाहिए। ऐसे में मरना गरीब का हो रहा है। जबकि खाद्य विभाग और नगर निगम मिलकर दोनों गया राशन खत्म होने के बाद अब फिर से लोगों के सामने परेशानी खड़ी हो चुकी है। कारोंद, गैस राहत कॉलोनी, बरखेड़ी, ऐशबाग सहित अन्य राशन दुकानें ज्यादातर बंद रहती हैं। जो खुलती हैं उनमें सेल्समैन ये कह देते हैं कि कोटा ही नहीं आया।

लॉकडाउन 4.0 आते-आते दिहाड़ी मजदूरों और अन्य रोज कमाने खाने वालों के यहां राशन खत्म हो चुका है। जबकि साशन स्तर से तीन लाख 145 परिवारों के सदस्यों को माह अप्रैल एवं मई का प्रति सदस्य 5 किलो ग्राम चावल एक मुश्त निशुल्क वितरण करने का कोटा दिया गया था। जिसे भोपाल जिले के 447 उचित मूल्य दुकानों से वितरित किए जाने का दावा किया जा रहा है। इसमें से कितना बंटा, कितने की कालाबाजारी हुई कोई नहीं पता। लेकिन गरीब की थाली आज भी खाली है। उपभोक्ताओं को पात्रता अनुसार नगर निगम भोपाल में 72, हुजूर अनुविभाग मे 61 तथा बैरसिया अनुविभाग में 115 शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर कुल गेहूं 5339.12 क्विंटल तथा चावल 1334.78 क्विंटल अप्रैल मई में जारी हुआ। इसमें अधिकांश कालाबाजारी की भेंट चढ़ गया।

भटकर रही हैं गैस पीडि़त बुजुर्ग
करोंद स्थित गैस राहत कॉलोनी में रहने वाली गैस पीडि़त बुजुर्ग विधवाओं की पेंशन और राशन को लेकर संघर्ष करने वाले बालकृष्ण नामदेव गुरुवार को परेशान होकर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री से मिलने गए, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। नामदेव बताते हैं कि स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि बुजुर्ग महिलाओं के पास खाने को नहीं है। एक किलो दाल दी है, न आटा है न तेल है। ऐसे में कैसे गुजारा होगा। कलेक्टोरेट में जाने पर अफसर मिलते नहीं हैं।

जिन लोगों को राशन नहीं मिल रहा है, उस संबंध में अधिकारियों को निर्देश देकर राशन उपलब्ध कराया जाएगा। अगर कहीं जरूरत हुई तो दुकान और अन्य की जांच भी कराई जाएगी।
तरुण पिथोड़े, कलेक्टर