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ईको फ्रेंडली राखी और गणेश प्रतिमा बनाने की सीख रहे कला

-गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ द्वारा स्कूलों में बच्चों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

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ईको फ्रेंडली राखी और गणेश प्रतिमा बनाने की सीख रहे कला

भोपाल. पर्यावरण संरक्षण के लिए गायत्री परिवार के युवा प्रकोष्ठ द्वारा एक सकारात्मक पहल की गई है। इसके तहत सरकारी और निजी स्कूलों में युवा प्रकोष्ठ के साधकों द्वारा बच्चों को ईको फ्रेण्डली राखी और गणेश बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे वे अपने घर में ईको फ्रेंडली राखी और गणेश को बना सके। साथ ही एक कदम पर्यावरण संरक्षण की तरफ बढ़ा सके। भोपाल में इस प्रशिक्षण की शुरूआत जुलाई के अंतिम सप्ताह से की गई है। भेल, होशंगाबाद रोड और एमपी नगर के सरकारी स्कूल और कॉलेज में पांच प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से करीब 1500 बच्चों को ईको फ्रेण्डली राखी और गणेश बनाना सिखाया जा चुका है। युवा प्रकोष्ठ हर रविवार को गायत्री पीठ एमपी नगर में भी दोपहर तीन से पांच बजे तक दो घंटे का प्रशिक्षण शिविर लगाता है।

10 रु. में बन जाती है राखी
गायत्री युवा प्रकोष्ठ की मास्टर ट्रेनर सीमा भावली ने बताया कि ईको फ्रेण्डली राखी और गणेश बनाने में कोई खास लागत भी नहीं लगती है। बाजार में सामान्य से राखी 30 से 40रुपए में मिलती है। बाजार से खरीदी गई राशि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाती है। ईको फ्रेण्डली राखी महज 10 रुपए में तैयार हो जाती है और पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं होता है। मास्टर ट्रेनर सीमा कहती हैं कि बाजार में मिलने वाली राखियों की अपेक्षा ईको फ्रेण्डली राखी सुदंर और मजबूत होती है। ईक्रो फ्रेण्डली राशि में अधिक से अधिक कलावे का उपयोग किया जाता है।

स्वदेशी को मिलता है संबल
गायत्री परिवार की साधक सीमा बताती हैं कि बहनों को भाई की कलाई पर खुद के द्वारा बनाई गई राखी ही बांधनी चाहिए। पहले महिलाएं खुद राखी बनाकर अपने भाइयों को बांधती थीं। खुद के द्वारा बनाई गई राखी से न केवल स्वदेशी की भावना मजबूत होती है, बल्कि भाई को एक अलग अनुभूति प्राप्त होती है।