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मर्जर का मर्ज जस का तस

-वर्ष २०१३ के विधानसभा चुनाव में दोनों ही प्रमुख दलों ने किया था समाधान का वादा

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मर्जर का मर्ज जस का तस

भोपाल। तमाम वादों और दावों के बाद भी संत हिरदाराम नगर एवं आसपास के क्षेत्रों के रहवासियों की सबसे बड़ी परेशानी का हल नहीं निकाला जा सका है। मर्जर समस्या के कारण रहवासियों उनकी संपत्ति पर मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों ही प्रमुख दलों ने मर्जर की समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया था, पर पांच साल बीतने के बाद भी मर्जर का मर्ज जस का तस है।

इसी तरह सिंधी विस्थापितों को पट्टा मिलने में होने वाली दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। ये स्थिति तब है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मर्जर की समस्या हल करने के साथ ही सिंधी विस्थापितों को पट्टा वितरण करने की घोषणा कर चुके हैं। स्थानीय रहवासियों का मानना है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण सीएम की घोषणा को पूरा करने में देरी की जा रही है।

गौरतलब है कि मर्जर की वजह से संतनगर एवं आसपास के क्षेत्रों में किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति न तो नगर निगम दे रहा है और न ही नजूल। हालांकि राज्य सरकार ने मर्जर की समस्या का समाधान करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही थी तो रहवासियों को मर्जर से मुक्ति की आस बंधी थी, पर मर्जर को खत्म करने की प्रक्रिया अभी भी मुकाम तक नहीं पहुंच सकी है। इसी तरह पट्टा वितरण करने की घोषणा भी साकार नहीं हो सकी है।

विस्थापितों के मुताबिक राजस्व विभाग द्वारा लगाए गए कैंप में उन दस्तावेजों की मांग की जा रही है जो उनके पास उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मर्जर, पट्टा वितरण में देरी रहवासियों के लिए आफत बनी हुई है।

मर्जर का दंश झेलने को मजबूर
भोपाल नवाब एवं भारत सरकार के बीच ३० अप्रैल १९४९ को हुए विलीनीकरण अनुबंध के अनुसार राजस्व अभिलेख में संतनगर एवं आसपास की कई एकड़ जमीन को शासकीय भूमि के रूप में दर्ज करने की कार्रवाई कलेक्टर द्वारा की गई थी। इस दौरान संतनगर समेत प्रभावित क्षेत्रों में भूमि पर काबिज लोगों की सूची भी जारी की गई। इस मर्जर के दायरे में सिंधी विस्थापितों के मकान एवं जमीन आई है। इसके अलावा संत हिरदाराम के समाधि स्थल को भी इसमें शामिल किया गया है। मर्जर के कारण रहवासी न तो संपत्ति का विक्रय कर पा रहे हैं और न ही निर्माण। इसके अलावा नामांतरण पर भी रोक लगी हुई है।

पट्टा वितरण भी अधर में
बरसों पहले आए सिंधी विस्थापित परिवारों को आज भी पट्टा नहीं मिल सका है। हालांकि राज्य शासन ने पट्टा वितरण की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने का आश्वासन दिया था, पर ये प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। पट्टा नहीं मिल पाने के कारण बरसों से काबिज विस्थापित परिवारों को मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा है। साथ ही पट्टा नवीनीकरण में भी तमाम पेच आ गए हैं।

मर्जर की समस्या के कारण नगर निगम एवं नजूल से किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं मिल रही है। इससे विस्थापितों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुरेश जसवानी, महासचिव, सिंधी सेंट्रल पंचायत

मर्जर के निराकरण सहित चुनाव पूर्व किये गए वादे याद हैं। मर्जर मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई चल रही है। पट्टों को लेकर भी सर्वे की प्रकिया पूरी हो चुकी है। जल्द ही संतनगर को इन समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। मतदाताओं से किये गये हर एक वायदे को पूरा किया जाएगा।
रामेश्वर शर्मा, विधायक