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World milk day: गांव बंद के तहत यदि दूध नहीं आया तो राजधानी में सांची करेगा ये उपाय!

किसान आंदोलन के तहत गांव बंद में यदि दूध नहीं आया तो राजधानी में सांची करेगा ये उपाय!...

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Sanchi milk supply

World milk day: गांव बंद के तहत यदि दूध नहीं आया तो राजधानी में सांची करेगा ये उपाय!

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल शहर में हर रोज करीब 5 हजार लीटर दूध की खपत होती हैं। इसमें लोग 2 हजार लीटर दूध दुग्ध संघ का और बाकी डेयरी व फेरी वालों से लेते हैं। सांची दूध पार्लर के अजय सिंह ने बताया कि उनके यहां से 22 कैरेट दूध की खपत होती है।

वहीं पूरे शहर में एक दिन में करीब 5 हजार लीटर की दूध की खपत होती है। उनका कहना है कि गांव बंद जैसी स्थिति में यदि गांव से दूध नहीं आता है तो उनके यहां पर दूध की डिमांड बढ़ जाएगी। इस डिमांड के अनुरूप दुग्ध संघ से दूध मिल पाता है।

किसान आंदोलन बना सिरदर्द...
वहीं 1 जून से शुरू होने जा रहे किसानों के प्रस्तावित आंदोलन से दूध की किल्लत से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके तहत दुग्ध संघ जिले के लिए दूध का भंडारण करके रखेगा।

अगर संकट गहराया तो पाउडर और बटर से दूध तैयार कर लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं ये भी सूचना सामने आ रही हैं कि 1 जून से दूध के टैंकर पुलिस के साए में चलेंगे, जिससे कि टैंकर लूटने जैसी कोई घटना न हो।

जानिये हर दिन की खपत:
सांची दुग्ध संघ भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार भोपाल में हर रोज करीब 3लाख लीटर दूध की खपत है। जिनमें से 2.25 लाख लीटर भोपाल शहर व करीब 72 हजार लीटर ग्रामीण में खपत होती है। भोपाल ग्रामीण में बैतुल व सागर भी आते हैं। संघ के मुताबिक हमारे यहां पूरा दूध भोपाल व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से ही आता है। जहां तक हर दिन आने वाले दूध की बात है तो इस संबंध में स्थिति घटती बढ़ती रहती है।


जानकारी के अनुसार गर्मियों के मौसम में दूध फट जाना ये खराब हो जाने की स्थितियों से बचने के लिए दूध का पाउडर भी यहां बनाया जाता है। और आवश्यकता पड़ने पर इस पाउडर का दूध बनाने में प्रयोग भी किया जाता है।

जानिये कहां से आता है दूध...
सांची दुग्ध संघ के एक रिटायर्ड कर्मचारी ने बताया कि हमारे यहां सारा दूध ग्रामीण क्षेत्रों से आता है। इसके तहत तहसील स्तर जिला स्तर सहित आदि जगहों पर केंद्र बनाए गए हैं। इसमें सबसे पहले ग्रामीण केंद्रों में ग्रामीणों से दूध एकत्रित किया जाता है, जहां से इसे तहसील स्तर पर भेजा जाता है।

वहां से दूध को टैंकरों के सहारे जिला स्तर या प्लांट पर भेजा जाता है। इस दौरान दूध में फैट चेक किया जाता है। वहीं प्लांट में पहुंचने के बाद दूध को पहले ठंडा किया जाता है। जिसके बाद पैकिंग कर विभिन्न सेंटरों में भेजा जाता है। यह एक मिक्स दूध होता है यानि इसमें गाय भैस दूध मिला रहता है।

वहीं किसी समय दूध की कमी होने पर पाउडर के दूध से दूध का निर्माण भी किया जाता है। इसके अलावा सांची और भी दूध से जुड़े जैसे घी, पेड़ा सहित कुछ प्रॉडक्ट का निर्माण करता है।

कम दरों में ढ़ो रहे हैं दूध...
सांची के प्लांट में दूध परिवहन में लगे टैंकरों से जुड़ा एक सच यह भी है जो खुद चोरी की कहानी कह रहा है। इन टैंकरों से जिस रेट पर दूध का परिवहन हो रहा है, उस दर पर तो बड़ी टैक्सी भी किराए से नहीं मिल सकती।
पूर्व में इस संबंध में भोपाल दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जितेंद्र सिंह राजे भी कह चुके हैं कि मध्यप्रदेश सरकार के भंडार क्रय नियमों के चलते हम बंधे हुए हैं। टेंडर में जो सबसे कम दर आती है उसे ही कांट्रेक्ट देना हमारी मजबूरी है।


कई बार आ चुका है संदेह में...
समय समय पर दूध को लेकर कई बार शिकायतें भी आ चुकी है। अभी कुछ समय यह मामला सामने आया कि डेयरी से चले दूध में सांची दुग्ध संघ तक पहुंचते तक मिलावट हो जाती थी। दुग्ध संघ की जांच रिपोर्ट के आधार पर गोविंदपुरा पुलिस ने दूध टैंकर संचालन करने वाली महिला पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने बताया कि सांची में सहायक महाप्रबंधक अनिल काशिव ने शनिवार को टैंकर क्रमांक एमपी 04 सीबी 2214 की मालिक टैंकर संचालिका फंदा निवासी पांचा बाई पर धोखाधड़ी करने का शिकायती आवेदन दिया था।

शिकायत में उल्लेख किया गया कि डेयरी से चलने वाले दूध की गुणवत्ता की जांच होती है, उसका मिलान सांची पहुंचे दूध की गुणवत्ता से किया जाता है। एक माह पूर्व टैंकर की जांच करने पर उसकी गुणवत्ता डेयरी से चले दूध की जांच रिपोर्ट की गुणवत्ता से खराब मिली। इस आधार पर रास्ते में मिलावट की पुष्टि हुई।

सांची दुग्ध संघ से मिली जांच रिपोर्ट के आधार पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस मामले में संघ 5-6 ठेका श्रमिकों को पहले ही सस्पेंड कर चुका है। एक मैनेजर पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी थी, लेकिन संघ ने अपने स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

ये करने जा रहे हैं खास व्यवस्था...
- मध्यप्रदेश सांची दुग्ध संघ के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन दुग्ध संघों का अप्रैल-मई महीने में 14 प्रतिशत बाजार गिर गया। सांची दूध की खुले बाजार में बिक्री नहीं होने से यह गिरावट सामने आई है। जबकि सांची के ग्राहकों में कोई कमी दर्ज नहीं की गई है।

बाजार में खुला दूध की आवक अधिक होने से सांची का बाजार गिर गया। अब सांची दुग्ध संघ इस गिरावट की भरपाई के लि नई-नई योजना लागू करने जा रहा है। 1 जून को सांची दूध की वेंडिंग मशीन लगाई जाएगी। पहली मशीन भोपाल के आइएसबीटी पर लगाई जाएगी, जिससे 24 घंटे दुध मिलेगा। वहीं, मासिक कार्ड बनवाने वालों को 50 पैसे प्रति लीटर की छूट भी दी जाएगी। दूध की कीमतें गिरने पर के बाद नए सिरे से मार्केट स्ट्रेटजी प्लान की जा रही रही है।

दो महीने की गिरावट से सालभर के बाजार का आंकलन नहीं लगाया जा सकता है। इस साल की बिक्री पिछले साल से अधिक है, लेकिन खुले बाजार में दूध की आवक अधिक होने से बाजार में सांची दूध कम बिका। हमारे नियमित ग्राहकों में कोई कमी नहीं आई लेकिन खुला बाजार के कारण यह स्थिति निर्मित हुई, इसे सुधारने के लिए हमने अलग-अलग मार्केट स्ट्रेटजी तैयार की है, जिसके अनुसार काम होगा।
- अरुणा गुप्ता, एमडी, दुग्ध संघ

- वहीं इससे पहले चालू हुआ योजना के तहत राजधानी भोपाल में सांची दूध व उत्पाद बेचने वाले विक्रेता अब ऑन लाइन दूध व उत्पाद मंगा सकेंगे। दुग्ध संघ ने इसके लिए ऑनलाइन डिमांड एप लांच कर दिया है। अभी तक विक्रेताओं को फोन पर दूध व उत्पाद मंगाने आर्डर देते थे। इसमें समय अधिक लगता था संघ के कर्मचारी भी आर्डर लेने में उलझे रहते थे।एप के जरिए इन झंझटों से मुक्ति मिल मिलेगी। बता दें कि एप का कुछ दिनों से ट्रायल चल रहा था। अब यह सभी विक्रेताओं के लिए ऑनलाइन उपलब्ध हो गया है।