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प्रदेश से सटी सात में से 5 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा, भाजपा को मिलीं सिर्फ दो सीटें

मप्र को छूते हुए गुजरात के हिस्से में भाजपा को सात में से पांच सीटों पर हार मिली है।

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bhopal BJP office

BJP office Bhopal, Madhya Pradesh

भोपाल। गुजरात में भले ही कमल खिला हो और वहां भाजपा एक बार फिर सरकार बनाने जा रही हो, लेकिन ये परिणाम मध्यप्रदेश में भाजपा के लिए चिंता का सबब बन सकते हैं। मप्र को छूते हुए गुजरात के हिस्से में भाजपा को सात में से पांच सीटों पर हार मिली है। यहां कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं, सिर्फ दो सीटें भाजपा के हाथ आई है।मध्यप्रदेश क ा मालवा अंचल गुजरात को छूता है।

यहां के दो जिले झाबुआ और अलीराजपुर गुजरात के दाहोद और छोटा उदयपुर जिले को छूते हैं। साथ ही मप्र के रतलाम, धार, बड़वानी, उज्जैन, इंदौर, खरगौन सहित लगभग पूरे मालवा अंचल में गुजरात के सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों का असर साफ नजर आता है। दिलचस्प पहलू यह है कि मप्र के मालवा से सटे गुजरात में भाजपा का जादू नहीं चल पाया। यहां अधिकांशत: आदिवासी बाहुल्य इलाका है और भील, राठवा, भाभोरा, परमार, पटेल, बारिया और नायक जाति की संख्या ज्यादा है। हालांकि इनमें से कुछ सीटें परंपरागत रूप से कांग्रेस के ही कब्जे में रही हैं, लेकिन इस बार मोदी की लहर का असर भी यहां नजर नहीं आया और कांग्रेस को ही बढ़त मिली है।

गौरतलब है कि मालवा की झाबुआ-रतलाम संसदीय सीट उपचुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया पहले ही भाजपा से हथिया चुके हैं। उधर मालवा में हुए किसान आंदोलन का भी असर इस इलाके में है। ऐसे में गुजरात की सरहदी सीटों पर कांग्रेस की जीत भाजपा के लिए मप्र में 2018 के चुनाव में सिरदर्द साबित हो सकती है।

गुजरात इफेक्ट दिखेगा मप्र में, संगठन होगा मजबूत
गुजरात में कांगे्रस ने सत्तारूढ़ दल भाजपा को चुनाव मैदान में कड़ी टक्कर दी, पर सत्ता का वनवास पूरा नहीं हो सका। इसका असर मप्र में नजर आएगा। अगले साल होने वाले आम चुनाव की तैयारी में जुटी कांगे्रस का फोकस संगठन को मजबूत करने के साथ बूथ स्तर पर कार्यकर्ताआें की फौज तैयार करना होगा।

वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में मप्र में भाजपा को प्रचंड बहुमत देकर मतदाताओं ने सत्ता तक पहुंचाया था। तब से लगातार भाजपा चुनाव जीती, पर उनकी विधानसभा सीटों की संख्या कम होती गई। कांग्रेस में इजाफा हुआ। गुजरात में भाजपा के दो अंकों में सिमटने को कांग्रेस सुखद मान रही है। मप्र में सत्ता तक पहुंचने का ख्वाब देख रही कांग्रेस कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती।

पार्टी में कमजोर कडि़यों को तलाशने के साथ असंतुष्टों को साधने का क्रम शुरू होगा। यहां नए लोगों को मौका मिलेगा। इसके लिए पार्टी आंतरिक सर्वे कराएगी। राहुल के कमान संभालने के साथ पार्टी का फोकस यूथ पर अधिक है। इसलिए अधिक से यूथ को जोडऩे के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है। क्षेत्र में खराब परफॉरमेंस वाले विधायकों का टिकट भी काटने से इस बार पार्टी कोई गुरेज नहीं करेगी।

दिग्विजय-उमा मामले में फैसला 28 को
पूर्व मुख्यमंत्री-कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की ओर से भाजपा नेता-पूर्व सीएम उमा भारती के खिलाफ दायर मानहानि के मामले में 28 दिसंबर को फैसला होगा। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार शर्मा ने सोमवार को हुई सुनवाई के बाद मामले में फैसले के लिए यह तारीख तय की है। कोर्ट में सोमवार को दोनों की ओर से अंतिम तर्क होने थे। वकीलों ने इसके लिए समय की मांग की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देशित किया है कि दोनों पक्ष चाहें तो लिखित बहस पेश कर सकते हैं।

भाजपा अजा मोर्चा की बैठक गुना में
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक जनवरी में गुना में होगी। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद सोनकर और पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत बैठक के उदघाटन सत्र में भाग लेंगे। केन्द्रीय सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री थावरचन्द गेहलोत व केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री वीरेन्द्र खटीक बैठक को संबोधित करेंगे। दूसरे दिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नंदकुमार सिंह चौहान मार्गदर्शन देंगे। बैठक का समापन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे।