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जानें ऐसा क्या बना लिया मप्र ने जिसने नहीं मिल रहा खरीददार

आेपन मार्केट में भी प्रदेश को खरीदार नहीं मिल रहे, जबकि पहले से खरीदी के एमओयू हैं। इसलिए बिजली तो खरीदनी ही है, लेकिन उसे बेचे कहां? यह बड़ी परेशानी है। 

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rb singh

Dec 26, 2016

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भोपाल
. मप्र सरप्लस बिजली वाला राज्य है, लेकिन ये हालात मुश्किल भी खड़ी कर रहे हैं। बिजली भरपूर है, और अब मांग कम हो गई। ऐसे में सरप्लस बिजली को लेने वाला कोई नहीं। आेपन मार्केट में भी प्रदेश को खरीदार नहीं मिल रहे, जबकि पहले से खरीदी के एमओयू हैं। इसलिए बिजली तो खरीदनी ही है, लेकिन उसे बेचे कहां? यह बड़ी परेशानी है। रबी के सीजन में थोड़ी मांग है भी, जबकि घरेलू उपभोग तो बिलकुल घट गया है। सरप्लस बिजली खपाने की समस्या है।


यह है गणित

प्रदेश में अभी औसत उत्पादन, 2500 मेगावाट औसत निजी सेक्टर से लेने और 2200-2400 मेगावाट नेशनल ग्रिड कोटा सहित कुल 6800 से 7500 मेगावाट औसत बिजली हो रही है, जबकि मांग 5500 मेगावाट तक है। वहीं 500 मेगावाट निजी एमओयू के तहत निजी कंपनियों से खरीदी रहे हैं। हर दिन 3000 मेगावाट तक खपाना है, लेकिन मार्केट में कोई खरीदने वाला ही नहीं है। ओपन मार्केट में मांग कम है।


खरीदी-बिक्री में घाटा

बिजली सरप्लस से हाल एेसा है कि खरीदी-बिक्री दोनों में घाटा हाथ आ रहा है। खरीदी औसत 3.50 से 5.50 रुपए प्रति यूनिट औसत तक कंपनियों से है, जबकि बेचने पर 2.50 से 3.25 रुपए प्रति यूनिट तक ही मिल पा रहे हैं। अधिकतर यूनिट बिजली को फिजूल ही जा रही है। इससे एकतरफा राशि बिजली पर खर्च हो रही है। इसकी वजह पहले से खरीदी के करार होना है।


यह होगा असर

बिजली खरीदी में इस घाटे को भी अंत में आम आदमी पर बोझ के रूप में लाद दिया जाता है। बिजली कंपनियां इस घाटे की दर वृद्धि के जरिए पूर्ति करती हंै। खरीदी को दर वृद्धि प्रस्ताव में मान्य किया जाता है, इसीलिए कंपनियों की सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।



शार्ट और लांग टर्म दोनों तरीके से बिजली की खरीदी में कमीशनबाजी का खेल होता है, इसलिए मुख्य रूप से सरकारी पॉवर प्लांट्स का ही इस्तेमाल होना चाहिए। अफसोस कि अभी सरकार में इससे उलटा हो रहा है। सरकारी प्लांट्स को बंद किया जा रहा है और निजी खरीदी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे इस तरह का घाटा होना ही है। इससे बाद में बिजली महंगी हो जाएगी। इसका समाधान सिर्फ सरकारी प्लांट्स को बढ़ावा ही है, क्योंकि उस स्थिति में खरीदी की बंदिश नहीं रह जाएगी।

- अनिरुद्ध वाजपेयी, ऊर्जा विशेषज्ञ

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