
भोपाल. कमलनाथ सरकार ने प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए अब रोजगार कार्यालय में पंजीयन अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था के बाद पंजीयन भी प्रदेश के मूल निवासियों का ही होगा। गुरुवार को मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। बैठक में 10वीं-12वीं मध्यप्रदेश से पास करने वाले को नौकरी देने की अनिवार्यता के प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन न्यायालय का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया गया। इसकी शुरुआत हाल ही में निकली एमपी पीएससी भर्ती से हो चुकी है। अब इसे व्यापमं सहित सभी स्तर की नौकरियों में लागू किया जा रहा है। रोजगार कार्यालय में पंजीयन प्रक्रिया को सख्त करने की तैयारी है।
वहीं नौकरी के लिए 10वीं-12वीं प्रदेश से ही पास करने की अनिवार्यता के प्रस्ताव को खारिज करते समय यह भी सामने आया कि 2007-08 में भी इसके प्रयास हुए थे। तब हाईकोर्ट के आदेश के कारण इसे लागू नहीं किया गया था। गुरुवार को भी इसी का हवाला दिया गया। शिक्षकों की वेतन-विसंगति को लेकर वित्त विभाग को मामला भेजना तय किया गया। इसके तहत एक कमेटी बनाकर इन विसंगतियों को दूर करने का काम होगा।
ये होगी व्यवस्था
रोजगार कार्यालय में पंजीयन सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें आवेदक को निवास प्रमाण-पत्र अपलोड करना होगा। मूल निवासी संबंधित दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। सॉफ्टवेयर तभी पंजीयन पूरा करेगा, जब आवेदक दस्तावेजों के कोड फीड करेंगे। सत्यापन का जिम्मा एम्पलॉयर का होगा।
दसवीं-बारहवीं की अनिवार्यता खारिज
जीएडी ने सीएस के सामने दसवीं-बारहवीं मप्र से ही करने की अनिवार्यता भी सरकारी नौकरी से करने के लिए प्रस्ताव रखा, लेकिन इसे हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के आधार पर खारिज कर दिया गया। दरअसल, 2007-08 में भी पिछली सरकार के समय इसके प्रयास हुए थे, लेकिन तब हाईकोर्ट के आदेश के कारण इसे लागू नहीं किया गया था। गुरुवार को भी इसी का हवाला दिया गया। इसके अलावा शिक्षकों की वेतन-विसंगति को लेकर वित्त विभाग को पूरा मामला भेजना तय किया गया। इसके तहत वित्त विभाग के तहत एक कमेटी बनाकर इन विसंगतियों को दूर करने का काम होगा।
संवैधानिक पदों पर रोस्टर भी खारिज
कांग्रेस ने वचन-पत्र में संवैधानिक पदों पर जातिगत आरक्षण का रोस्टर लागू करने का वचन दिया था, लेकिन अब सरकार ने इसे खारिज करना तय किया है। गुरुवार को इसका प्रस्ताव रखा गया, तो मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने इसे व्यावहारिक नहीं पाया। इसके तहत इसका पूरा प्रस्ताव खारिज करने के लिए अब सीएम के पास फाइल भेजी जाएगी। दरअसल, संवैधानिक पदों में मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष, विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष सहित अन्य आयोगों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के पद आते हैं। जातिगत आरक्षण रोस्टर लागू करने पर इन पदों पर क्रम बद्ध तरीके से सवर्ण, अजजा, जजा व ओबीसी वर्ग से नियुक्ति करना पड़ेगी। सीएस ने माना कि ऐसा करने से योग्यता के पैमाने का पालन नहीं हो पाएगा। इसलिए जातिगत आरक्षण की बजाए योग्यता को ही चयन का पैमाना रखने का प्रस्ताव भेजना तय किया गया है।
Published on:
29 Nov 2019 04:04 am
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