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Tax : हर किसी को जमा करने पड़ते हैं ये 9 टैक्स , लेकिन पता किसी को नहीं होता

Tax : अलग-अलग विभाग आपसे किस तरह का टैक्स लेते हैं, इस तरह से समझिए....

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भोपाल। हर कोई प्रॉपर्टी बनाना चाहता है। घर-मकान, दुकान। देश के लोकसभा चुनाव में भी विरासत टैक्स के तौर पर संपत्ति से जुड़े टैक्स पर चर्चा हो रही है, लेकिन शायद आपने ध्यान नहीं दिया, लेकिन आप अपने मकान-दुकान-जमीन पर पूरे साल में नौ से ज्यादा तरह के टैक्स देते हैं। नगर निगम का संपत्तिकर तो सबको पता है, लेकिन इसके अलावा अलग-अलग विभाग आपसे किस तरह का टैक्स लेते हैं, इस तरह से समझिए।

संपत्ति पर लगते हैं यह टैक्स

● 1000 वर्गफीट का मकान है तो औसमन करीब 4000 सालाना संपत्तिकर बनता है।

● नगर निगम हर संपत्ति मालिक से नर्मदा उपकर, शिक्षा उपकर, प्रकाश कर, समेकित कर, स्वच्छता कर के तौर पर 1000 वर्गफीट की संपत्तिधारक से सालाना करीब 1500 रुपए की राशि वसूल लेता है

● मकान-प्लॉट या फ्लेट कवर्ड कैंपस में है तो प्रति मकान प्रतिमाह 800 से 1200 रुपए तक मेंटेनेंस चार्ज लेता है।

● संपत्ति यदि बीडीए, हाउसिंग बोर्ड या नजूल की जमीन से जुड़ी है तो 1000 वर्गफीट के मकान-प्लॉट पर ये सालाना 4000 से 5000 रुपए बनता है।

● संपत्ति में यदि कोई दुकान शुरू कर दी है तो व्यवसायिक दर से टैक्स वसूला जाता है।

● दुकान के लिए लाइसेंस जारी होता है और सात रुपए प्रतिवर्गफीट वसूलता है।

● यदि बाजार में कोई दुकान है तो वहां तहबाजारी के तौर पर सालाना 1000 रुपए का टैक्स लगता है

● संपत्ति की बिक्री करने पर कलेक्टर गाइडलाइन का दस फीसदी तक शुल्क स्टांप ड्यूटी के तौर पर देना होता है।

● कृषि भूमि है तो जिला प्रशासन सालाना पटवारी के माध्यम से उसका टैक्स जमा कराता है।

संपत्ति रखना सस्ता नहीं है। जिस तरह संपत्तियां बनाने के लिए लोग आतुर रहते हैं, जैसे ही उसका सालाना खर्च पता चलता है वे निराश हो जाते हैं। संपत्ति पर कई विभाग अपने स्तर पर टैक्स वसूलते हैं।

वीके चतुर्वेदी, रिटायर्ड अफसर, राज्य प्रशासनिक सेवा