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महंगा होने के बाद भी पहले वाले दामों पर मिल रहा यहां हर सामान, देखें रेट लिस्ट, जानिये क्या है कारण

महंगाई के बावजूद पहले वाले दामों पर मिल रहा यहां सामान

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महंगा होने के बाद भी पहले वाले दामों पर मिल रहा यहां हर सामान, देखें रेट लिस्ट, जानिये क्या है कारण

महंगा होने के बाद भी पहले वाले दामों पर मिल रहा यहां हर सामान, देखें रेट लिस्ट, जानिये क्या है कारण

भोपाल. बाजार में कई वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं, लेकिन कंपनियों द्वारा उन्हें पहले वाले दाम पर ही बेचा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने वस्तुओं के दाम बढ़ाने की जगह वजन में कमी कर दी है, ऐसे में उपभोक्ताओं पर महंगाई की मार तो पड़ रही है, लेकिन कंपनियों के चतुराई के कारण उपभोक्ता उसे समझ नहीं पा रहे हैं, उदाहरण के लिए अगर कोई चीज पहले 100 रुपए की 250 ग्राम आती थी, तो उसे अब 100 रुपए की 200 ग्राम कर दी है, ऐसे में उपभोक्ता को वह पैकिंग सामग्री पहले वाली कीमत पर ही मिल रही है, लेकिन असलियत में उसे वह चीज महंगी मिल रही है, क्योंकि उसे अब पहले से कम वजन मिल रहा है, ऐसे में वह सामग्री उसके घर में पहले की अपेक्षा 5-7 दिन पहले ही खत्म हो जाएगी।

आम उपभोक्ता सामान की कीमतें कम-ज्यादा होने में पेट्रोल या डीजल के दाम का योगदान होता है। ईंधन के दाम बढ़ते ही महंगाई बढ़ती है और कम होने पर कंपनियां वस्तुओं के दाम घटा देती हैं। पर इस बार महंगाई को लेकर बाजार बदला हुआ है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम को रोकते हुए एक्साइज ड्यूटी घटा दी। इससे ईंधन के दाम तो कम हुए, पर उपभोक्ता वस्तुओं के दाम पहले जैसे हैं। एलपीजी सिलेंडर के दाम लगातार बढऩे से रसोई का बजट भी गड़बड़ हो गया।


कंपनियों ने घटाया वजन:

कई कंपनियों ने महंगाई कम करने का दूसरा रास्ता निकाला। उन्होंने सामान के दाम नहीं घटाए, वजन कम कर दिया। कुछ बिस्किट व साबुन बनाने वाली कंपनियों ने खासकर ऐसा किया है। ये कंपनियां एमआरपी पर माल बेच रही हैं।

बाजार मांग और आपूर्ति के पैटर्न पर चलता है। जिसकी मांग ज्यादा होती है, उसके भाव बढ़ते हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम में कमी का सवाल है तो इसमें कई फैक्टर काम करते हैं। जैसे बढ़ा हुआ मालभाड़ा कम नहीं हुआ। अभी खाद्य तेल सस्ते हुए हैं, मसालों में तेजी है। कुछ वस्तुओं के दाम घटे हैं तो कुछ के बढ़े दाम नीचे नहीं आए है। आम उपभोक्ता को महंगाई से ज्यादा राहत नहीं मिल रही। कुछ कंपनियों ने रेट नहीं बढ़ाए तो एमआरपी पर माल बेचना शुरू कर दिया और वजन में कटौती कर दी।

आदित्य जैन मनयां

मानसून पर निर्भर:

दालों के थोक कारोबारी ईश्वर संगतानी का कहना है,दाल बाजार में मामूली तेजी-मंदी है, बारिश की लंबी खेंच होती है तो दाल महंगी हो जाएगी। कुछ माह में मूंग दाल, चना दाल में गिरावट आई है, जबकि उड़द और मसूर दाल के भावों में मामूली तेजी आई। तुअर दाल लंबे समय से स्थिर है।