
खेलो इंडिया से बच्चों को एक्सपोजर मिलेगा। जो यहां अच्छा परफॉर्म करेंगे, वे नेशनल के लिए दावेदारी कर पाएंगे। इस खेल में जब गांव का खिलाड़ी खेलेगा तो पूरे जिले में उस खेल के प्रति लोगों में दीवानगी बढ़ेगी। जब वो मेडल जीतेगा तो उसके साथी प्रेरित होंगे कि हम भी ये कर सकते हैं। इसका फायदा प्रदेश को मिलेगा। आने वाले समय में कॉम्पीटिशन और तगड़ा होगा। सरकार ने अकादमी स्तर पर अच्छा काम किया है। अब गांवों तक इसे पहुंचाने की जरूरत है। अभी स्कूल-कॉलेज गेम्स को गंभीरता से नहीं लिया जाता। जब टीचर और कोच बच्चों को बताएंगे कि ये टूर्नामेंट और मेडल भी उतना ही जरूरी है, जितना ओलिंपिक में जीता मेडल। इससे खिलाड़ी दोगुनी ऊर्जा से खेलेगा। इसके लिए जरूरी है कि इन खेल, मैदान और खिलाडिय़ों के ठहरने की जगहों, खान-पान पर खर्च कर उनकी ब्राडिंग कर उन्हें भव्यता दी जाए। बच्चों को भी अपने खेल का खुद आकलन करना होगा। खिलाडिय़ों को तकनीक को शामिल कर खेल को निखारना होगा।
0 मध्यप्रदेश में अपने आप को विश्व स्तर पर छाने के लिए संभावनाएं हैं। बस कोच व खेलों से जुड़े लोगों को योगदान और बढ़ाना होगा।
इतने बड़े आयोजन में शामिल होने से खिलाड़ियों का एक्सपोजर बढ़ेगा। वे आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के तनाव को झेलना सीख जाएंगे। हमारे गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं है। बस सरकार को टैलेंट सर्च से एथलेटिक्स को बढ़ावा देना होगा। एथलेटिक्स में 40 खेल होते हैं, जब खिलाड़ी अपने प्रतिद्वंदी को खेलते देखता है तो उसकी तकनीक और गेम प्लान की बारिकियों को भी समझने का मौका मिलता है। इसमें कॉम्पीटिशन की भावना जागृत होती है। खेलो इंडिया सरकार का अच्छा प्रयास है। पहले खेलों में पैसों का अभाव था। बड़े खिलाड़ी तो सुविधा हासिल कर पाते थे, लेकिन राज्य या राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को जूझना पड़ता था। सरकार आयोजन पर बड़ी राशि खर्च कर रही है, अच्छी ड्रेस, इक्यूपमेंट्स और बोर्डिंग-डाइट मिल रही है। आगामी समय में भी सरकार यदि खेलों पर इसी तरह खर्च करती है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छा जाएंगे। मप्र के जनजातीय समुदाय के युवाओं का स्टेमिना काफी ज्यादा है। सरकार को इसका उपयोग कर उन्हें खेलों से जोड़ना होगा।
0अकादमी के अलावा ब्लॉक और जिला स्तर पर भी कोच नियुक्त करने होंगे, जो खेल प्रतिभा को तराशकर उन्हें राज्य अकादमी तक भेजें।
एक्सपर्ट थिंकिंग: लोगों की सोच बदलेगी, आगे जाएगा प्रदेशआम आदमी में जागरुकता बढ़ेगी, वे बच्चों को भी खेलों से जोड़ेंगे
हमारे गांव-शहर आज भी पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे खराब...की सोच से पूरी तरह से उबर नहीं पाए हैं। जब प्रदेश में 27 खेल में हजारों खिलाड़ियों को लोग प्रत्यक्ष रूप से खेलते देखेंगे तो वे भी जागरूक होंगे और अपने बच्चों को खेल से जोड़ेंगे। यही इस आयोजन की सफलता होगी। अभी आम लोग क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, फुटबॉल और टेनिस को ही खेल समझते हैं। जब वे बच्चों को खेलते देखेंगे तो वे भी सारे खेलों को जान पाएंगे। 2010 में जब दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स हुए थे तो देश ने 101 मेडल जीते थे। इसके बाद खेलों के प्रति लोगों की सोच ही बदल गई। आम आदमी ही नहीं सरकार ने भी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर फोकस किया। इसके बाद हमने ओलिंपिक में पांच मेेडल जीते। मध्यप्रदेश में 10 खेल अकादमियां हैं, इतनी किसी और राज्य में नहीं हैं। जब हमारे खिलाड़ी होम ग्राउंड पर अन्य टीमों से टक्कर लेंगे तो उनका जोश दोगुना होगा। हर पदक उम्मीद जगाएगा कि हम इन खिलाड़ियों के जरिए दुनिया में धमक दर्ज करा सकते हैं।
खिलाड़ी जब तक रिस्क नहीं लेगा वो अपना बेस्ट नहीं दे पाएगा। मैं भी नौकरी के पीछे भागता तो शायद आज यहां नहीं होता।
Updated on:
30 Jan 2023 11:27 am
Published on:
30 Jan 2023 11:25 am
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
