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भोपाल। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए इस पर छह महीने का स्टे लगा दिया। वहीं केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाने को कहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि देशभर में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचकर चर्चा का विषय बना ट्रिपल तलाक का विरोध, सबसे पहले मध्यप्रदेश की ही एक महिला ने किया था। यहां ट्रिपल तलाक के शरिया कानून पर सवालिया निशान लगाते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। पूरे देश में यह पहला ऐसा मामला था। सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल तलाक पर यह विषय खास हो चला है कि ट्रिपल तलाक के खिलाफ पहली याचिका किसने और कहाँ लगाई? इसका श्रेय मध्यप्रदेश को ही जाएगा। क्योंकि वर्ष 2010 में पहली बार यहां हाईकोर्ट में ट्रिपल तलाक के खिलाफ याचिका दायर की गई। जानें ऐसे ही रोचक फैक्ट...
2010 में लगी थी पहली याचिका
आपको जानकर हैरानी होगी कि सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का मुद्दा पहुंचने से पहले ही मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में वर्ष 2010 में ही पहुंच गया था। यहां एक महिला की प्रेरणा कुछ पीडि़त महिलाओं के लिए न्याय की आस बनी और इन महिलाओं ने हाईकोर्ट में इस शरिया कानून के खिलाफ याचिका दायर कर दी। हालांकि इन महिलाओं ने महिलाओं के एक एनजीओ की मदद से देशभर की यह पहली जनहित याचिका दायर की थी।
यूं बनी खास
* ट्रिपल तलाक की इस पहली याचिका में मेहर की रकम, तीन तलाक के मनमाने तरीके पर कोर्ट के दखल की मांग की गई।
* हालांकि बाद में यह मुद्दा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हवाले कर दिया गया जिस पर फैसला नहीं आया है।
फैसले से पहले इन्होंने कहा था
ऐसे बहुत से मामले काजी कैंप और महिला थाने में आ रहे हैं, जहां महिलाएं पति के मनमाने तरीके से तलाक देने की शिकायत कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में हजारों तलाक के मामलों पर असर पड़ेगा।
- आफताब अहमद, फैमिली काउंसलर
तीन तलाक के मनमाने तरीके से तलाक देने के खिलाफ फैसला आना जरूरी। हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई बीच का रास्ता निकालेगी।
- रूबीना शेख, सदस्य राष्ट्रीय मुस्लिम महिला संगठन
Published on:
22 Aug 2017 03:55 pm
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