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हर साल पांच हजार लोग बन रहे उद्यमी, मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति में सुधार, कोरोना के बाद बदले हालात

- प्लास्टिक बोतल, बेकरी, केमिकल, फूड आइटम्स, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, कई प्रकार की पैकिंग, नोट बुक मेकिंग सहित कई काम कर रहे लोग - पिछले तीन साल से 20 से 25 हजार लोगों को इन उद्यमों में रोजगार मिल रहा है, इस दिवाली 20 करोड़ रुपए सजावटी सामान यहीं बन रहा

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हर साल पांच हजार लोग बन रहे उद्यमी, मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति में सुधार, कोरोना के बाद बदले हालात

हर साल पांच हजार लोग बन रहे उद्यमी, मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति में सुधार, कोरोना के बाद बदले हालात

भोपाल. कोरोना के बाद बदली परिस्थितियों में अब लाेग अपना उद्यम खड़ा करने में ज्यादा विश्वास कर रहे हैं। पिछले तीन साल के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि शहर में 2020-21 के बाद हर साल पांच हजार के लगभग लोगों ने अपना कारोबार शुरू किया। हर साल 20 से 22 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। जिला प्रशासन के माध्यम से सूक्ष्म् लघु और मध्यम विभाग इस काम में लोगों की मदद कर रहा है। इससे मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है, वहीं शहर की इकोनॉमी में भी इनका योगदान बढ़ा है। विभाग के एक्सपर्ट बताते हैं कि छोटे काम में अब लोगों को ज्यादा आय हो रही है। राजधानी में छोटे बड़े करीब 60 हजार उद्यम विभाग में रजिस्टर्ड हैं।

दिवाली पर ही 20 करोड़ के सजावटी सामान का कारोबार
भोपाल ही नहीं मप्र और अन्य राज्यों में भी तेजी से ट्रांसपोर्टेशन सुगम होने से व्यापार के दरवाजे खुले हैं। गोविंदपुरा में ही लगी 35 फूड इंडस्टी में इन दिनों दिवाली को लेकर मिठाइयां तैयार की जा रही हैं। कई उद्यमी भारत की स्वदेशी झालरें बनाने में लगे हैं। तो वहीं कुछ लोग सजावटी सामान तक भोपाल में तैयार कर रहे हैं। जल्द ही ये सामान बाजार में दिखाई देने वाला है। पहले ये सामान इंदौर और आस-पास के क्षेत्रों से आता था, लेकिन अब भोपाल की भागीदारी भी इसमें बढ़ रही है। इस दिवाली पर ही भोपाल से करीब बीस करोड़ रुपए के सजावटी सामान के कारोबार होने का अनुमान है। ये रुपया पहले बाहर जाता था।

भोपाल में ही हर साल 20 से 25 हजार को रोजगार

लोगों के उद्यमी बनने से भोपाल ही में काफी रोजगार पैदा हो रहा है। विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल 20 से 25 हजार बेरोजगारों को भोपाल में ही रोजगार मिल रहा है। ये हर साल बढ़ भी रहा है। इससे शहर और आस-पास के सटे क्षेत्रों से पलायन भी रुका है। इन्हीं में से कुछ युवा काम सीखकर अपना काम भी शुरू कर चुके हैं। जो लोग कभी ये सोचते थे कि वे कैसे काम करेंगे, उनके पास आज अपने लघु उद्यम हैं।
वर्ष------उद्यम रजिस्टर्ड----रोजगार
2020-21---4959---------23060

2021-22---4786--------25642
2022-23---6870-------30434

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वर्जन

विभाग की मदद से फिनाइल भरने वाली प्लास्टिक बोतल बनाने का काम शुरू किया था। अब ये काम काफी अच्छा चल रहा है। आस-पास के अलावा इंदौर और कई जिलों में बोतलों की सप्लाई होती है।
रिषभ खंडेलवाल, युवा उद्यमी

वर्जन

जो लोग ईमानदारी और मेहनत से अच्छा काम करना चाहते हैं, ऐसे लोगों को विभाग की तरफ से लोन और कई सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। कोरोना के बाद तेजी से लोग अपना उद्यम खड़ा कर रहे हैं।
कैलाश मानेकर, जीएम, जिला उद्योग केंद्र