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अगर आपका बच्चा भी हो रहा है एग्रेसिव, तो एेसे बदलें Behavior

लेकिन साइकोलॉजिस्ट विनोद कहते हैं कि ऐसा करना खुद के साथ ही बच्चों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए पेरेंट्स कूल रहें और बच्चों को समझने की कोशिश करें...

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sanjana kumar

Aug 20, 2016

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भोपाल। ज्यादातर पेरेंट्स अपने बच्चे के एग्रेसिव होते नेचर के कारण तनाव में रहते हैं। उन्हें समझ ही नहीं आता कि वे बच्चे के गुस्से को कंट्रोल कैसे करें। जब बच्चा ज्यादा परेशान करने लगता है तो वे खुद ही एग्रेसिव होने लगते हैं। जिससे बच्चे का गुस्सा और बढ़ जाता है और वह पहले से ज्यादा रोने-चीखने लगता है। लेकिन साइकोलॉजिस्ट विनोद कहते हैं कि ऐसा करना खुद के साथ ही बच्चों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए पेरेंट्स कूल रहें और बच्चों को समझने की कोशिश करें। इसके लिए ये आसान तरीके अपनाएं और बच्चों के एग्रेसिव होते नेचर को यूं बदलें...

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एग्रेसिव होते बच्चे का ध्यान बांटने की कोशिश करें

यदि आप बच्चे को कहीं बाहर ले जाकर उसका उसका ध्यान कहीं और केंद्रित करने या करवाने की कोशिश करेंगे तो वह जल्द ही गुस्सा भूल जाएगा। ऐसे में वह चीज कुछ भी हो सकती है जैसे कोई किताब या कोई नया खिलौना। जैसे आप उसे बाहर लेकर गए और अपने पेट डॉगी को ही उसे दिखा दिया, तो वह जल्द ही कूल हो जाएगा।


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इस दौरान आप उसके साथ हंसी-मजाक करें। अपने चेहरे को तरह-तरह की शक्लें बनाकर उसे खुश करने की कोशिश करें।


गुस्सा होने का कारण जानने की कोशिश करें

आपका बच्चा बड़ा हो रहा है इसलिए उसके बिहेवियर पर ध्यान देना आपके लिए जरूरी ही नहीं अनिवार्य है। यदि आप चाहती हैं कि आपका बच्चा और एग्रेसिव न हो, तो ये जानने की कोशिश करें कि आखिर उसे गुस्सा क्यों आ रहा है। अगर वह चीजें इधर-उधर फेंके, चिढ़ कर रूस कर बैठे रहें या फिर चीखे और चिल्लाए तो आपको उनके साथ किस तरह से पेश आना चाहिए।


इस समय आप कूल रहें क्योंकि यदि आप भी गुस्सा होंगे तो उसकी स्थिति और खराब हो जाएगी। उसके व्यवहार पर नजर रखें।

किसी बात को न करें अनदेखा

कई बार ध्यान खींचने के लिए भी बच्चे एग्रेसिव होते हैं। उन्हें लगता है कि आप उनकी अनदेखी कर रहे हैं। इसलिए माता-पिता समेत लोगों का ध्यान खींचने के लिए वह इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं। अगर आप अपने गुस्से पर काबू रखने में खुद को असमर्थ समझते हैं, तो आप बच्चे से दूर होकर कमरे से बाहर आ सकते हैं।

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दो मिनट बाहर खड़े रहने के बाद हो सकता है कि बच्चा चुप हो जाए। वापस आने पर उसका ध्यान किसी और चीज में लगाने की कोशिश करें। अगर बच्चे की उम्र ज्यादा है तो उससे रोने की वजह और उस समस्या से निपटने की बात कर सकते हैं, ताकि अगली बार से वह ऐसा न करें।

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