22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CG News: महाराष्ट्र से 400 किमी की उड़ान भरकर छत्तीसगढ़ आया गिद्ध, वन विभाग ने किया सफल रेस्क्यू

CG News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में वन विभाग ने एक गिद्ध का सफल रेस्क्यू किया है, जो महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व से लगभग 400 किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर छत्तीसगढ़ पहुंचा था। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गिद्ध की स्थिति लंबी यात्रा के कारण अस्वस्थ थी […]

2 min read
Google source verification
CG News: महाराष्ट्र से 400 किमी की उड़ान भरकर छत्तीसगढ़ आया गिद्ध, वन विभाग ने किया सफल रेस्क्यू

CG News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में वन विभाग ने एक गिद्ध का सफल रेस्क्यू किया है, जो महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व से लगभग 400 किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर छत्तीसगढ़ पहुंचा था। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गिद्ध की स्थिति लंबी यात्रा के कारण अस्वस्थ थी और उसकी तबीयत बिगड़ने के पीछे डी-हाइड्रेशन या किसी अन्य बीमारी की आशंका जताई जा रही है।

जांच में यह खुलासा हुआ कि गिद्ध की पीठ पर माइक्रो ट्रांसमीटर और जीपीएस डिवाइस लगी हुई थी, जिससे उसकी उड़ान और गंतव्य का पूरा ट्रैक वन विभाग को पता चल सका। इसके आधार पर गिद्ध की वास्तविक स्थिति और उसकी लंबी यात्रा की जानकारी सामने आई। वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिद्ध को जंगल सफारी परिसर में सुरक्षित स्थान पर लाकर प्राथमिक देखभाल और इलाज शुरू किया। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि गिद्ध की देखभाल के लिए वन विभाग के डॉक्टर डॉ. जडिया और डॉ. ऋचा ने मिलकर उसकी निगरानी की।

गिद्ध की स्वास्थ्य स्थिति लगातार जांच में रखी गई और उसे पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक दवाइयां और पोषण भी दिया गया। वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि गिद्ध का रेस्क्यू और उसका इलाज जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया है। विभाग का कहना है कि गिद्ध जैसे पक्षी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि ये मृत जानवरों को साफ करके जंगल में स्वच्छता बनाए रखने में मदद करते हैं।

गिद्ध के स्वास्थ्य में सुधार के बाद वन विभाग इसे पुनः उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ देगा। इससे पहले गिद्ध की लंबी उड़ान और महाराष्ट्र से आने की जानकारी से वन विभाग को यह सुनिश्चित करने में मदद मिली कि पक्षी को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जाए। इस घटना से यह भी उजागर हुआ कि माइक्रो ट्रांसमीटर और जीपीएस तकनीक वन्यजीव अनुसंधान और संरक्षण में कितनी उपयोगी साबित हो रही है।

इससे वन विभाग को न केवल वन्यजीवों की वास्तविक स्थिति का पता चलता है, बल्कि उनके मार्ग, उड़ान दूरी और आवास क्षेत्र का अध्ययन करने में भी मदद मिलती है। अधिकारियों ने बताया गरियाबंद वन अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के रेस्क्यू और संरक्षण कार्य वन्यजीवों के प्रति जनता और स्थानीय समुदाय में जागरूकता फैलाने में भी मददगार साबित होते हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की है कि वन्यजीवों को परेशान न करें और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में सहयोग करें। गिद्ध का सुरक्षित रेस्क्यू और इलाज वन विभाग की तत्परता और जीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वन विभाग ने इस अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया कि किसी भी वन्यजीव की सुरक्षा के लिए तुरंत और समर्पित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण होती है।