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Peacock Death: मोर का शव बिस्किट बॉक्स में भेजा.. उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में मौत के बाद लापरवाही

Peacock Death: राष्ट्रीय पक्षी मोर के शव के साथ गंभीर लापरवाही बरती गई है। बता दें कि 1 फरवरी को संदिग्ध हालत में मोर का शव उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में मिला था..

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national bird peacock death case in cg

मोर का शव बिस्किट बॉक्स में भेजा (प्रतीकात्मक फोटो)

Peacock Death: उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में राष्ट्रीय पक्षी मोर के शव को लेकर विभागीय लापरवाही की खबर एक बार फिर से चर्चा में है। पत्रिका में प्रकाशित खबर के बाद वन विभाग में हलचल मच गई है और मामले में गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

Peacock Death: 1 फरवरी को संदिग्ध अवस्था में मिला था शव

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के सोरनामाल जंगल में 1 फरवरी को राष्ट्रीय पक्षी मोर का शव संदिग्ध अवस्था में मिला। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मोर का शिकार किया गया था। यह घटना कुल्हाड़ीघाट वन परिक्षेत्र से शुरू हुई, जहां एक बाज ने मोर का पीछा किया और उसे इंदागांव वन परिक्षेत्र के सोरनामाल कक्ष 1217 में मार डाला। कर्मचारियों ने घटना की जानकारी अधिकारियों को दी और तब अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

वन विभाग के उच्च अधिकारियों को इस घटना की सूचना विलंब से दी गई और इसे लेकर विभागीय संदेह और प्रश्न उठ रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने इसे राष्ट्रीय पक्षी का अपमान बताते हुए जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

अब देखना यह होगा

अब यह देखना होगा कि वन विभाग इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाता है और क्या दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मोर के शव के साथ असंवेदनशीलता

विभाग के अधिकारियों ने मोर के शव को बिना किसी सम्मान के शासकीय वाहन से मैनपुर लाया। उसे एक बिस्किट के बॉक्स में डालकर मैनपुर भेजा गया, जो कि वन्यजीवों के प्रति असंवेदनशीलता का प्रतीक है।

वन परिक्षेत्र अधिकारी की सफाई

वन परिक्षेत्र अधिकारी सुशील सागर ने बताया कि मोर के शव का पंचनामा तैयार कर उसे एक बॉक्स में सुरक्षित रखकर शासकीय वाहन से मैनपुर भेजा गया। डॉक्टरी टीम मैनपुर में थी, इसलिए शव वहां भेजा गया। पीएम के बाद दाह संस्कार किया गया।

कानूनी सुरक्षा के बावजूद लापरवाही

राष्ट्रीय पक्षी मोर को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची के तहत सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन फिर भी विभाग द्वारा मोर के शव के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। यह सवाल उठता है कि क्या मोर का दाह संस्कार कानूनी तरीके से हुआ? विभागीय अधिकारी क्यों चुप्पी साधे हुए हैं?