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500 साल तक होती है उम्र, डेढ़ से लेकर 60 इंच तक बोनसाई में आते हैं फल और फूल

गुलाब उद्यान में दो दिवसीय बोनसाई एग्जीबिशन शुरू, 510 गमले हुए शामिल, 8 कैटेगरी में दिए गए प्राइज

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500 साल तक होती है उम्र, डेढ़ से लेकर 60 इंच तक बोनसाई में आते हैं फल और फूल

भोपाल। बोनसाई क्लब की दो दिवसीय बोनसाई एग्जीबिशन शनिवार से लिंक रोड नम्बर-1 स्थित गुलाब उद्यान में शुरू हुई। एग्जीबिशन में डेढ़ इंच से लेकर 60 इंच तक की 510 बोनसाई डिस्प्ले किए गए। इन्हें 8 कैटेगरी में बांटा गया। इनमें फस्र्ट रहे बोनसाई को गोल्ड मेडल दिया गया। एग्जीबिशन में फोसिल वुड यानी जमीन में पेड़ों के दब जाने के बाद करोड़ों साल की कुदरती प्रक्रिया के बाद स्टोन में तब्दील होकर पत्थर का रूप लेने वाली पेंजिंग भी एग्जीबिट किए गए।

अधिकतम ऊंचाई 60 इंच तक होती है
क्लब की सचिव स्मिता लुनावत का कहना है कि बोनसाई की अधिकतम हाइट 60 इंच तक की होती है। कई बोनसाई लवर्स इससे भी ज्यादा हाइट के बोनसाई तैयार करते हैं, लेकिन टेक्निकली इसे बोनसाई नहीं कहा जाता। बोनसाई में पौधे भले ही छोटे हों, लेकिन इनके फल और फूल मूल पेड़-पौधे के साइज के ही आते हैं। इन खुशबू और स्वाद भी वैसा ही होता है। बोनसाई को एक्सट्रा केयर की आवश्यकता होती है। अधिकांश बोनसाई की लाइफ 500 सालों तक होती है। साल में तीन बार इसकी कटाई और मिट्टी बदलना पड़ता है।

एक छोटे पात्र में उगा सकते हैं
बोनसाई ऐसा वृक्ष होता है जिसे एक छोटे पात्र में उगा कर तैयार किया जाता है। बोनसाई जापानी शब्द बोन(अर्थ ट्रे) और सई(बढ़ रहा है) से लिया गया है। इसे ट्रे में बढ़ते पेड़ भी कहा जाता है। बोनसाई की कटाई-छंटाई कर उसकी ग्रोथ को रोका जाता है। सालों की मेहनत के बाद जाकर कोई पौधा बोनसाई वृक्ष बनता है। सबसे छोटे पौधे को बिन कहते हैं। खिरनी के बोनसाई की हाइट 60 इंच तक रखी जाती है। डेढ़ इंच के बिन को हर माह खाद देना पड़ती है। जड़ों को काटकर इसे सुरक्षित रखा जाता है।

नेचर के करीब आने का जरिया है
बोनसाई लवर ममता मिश्रा का कहना है कि वे पिछले 20 सालों से बोन्साई पर काम कर रहीं है। एग्जीबिशन में 10 साल पुराना पाखर बोन्साई लेकर आई हैं। भारत के नक्शे के साथ गमले को तैयार करने के पीछे कारण बताया कि आज भारत पूरी दुनिया में बोनसाई की फील्ड में आगे जा रहा है। सिम्बॉलिक तौर पर भारतीय नक्शे पर तैयार किया है। भारत को रिप्रेजेंट करने विदेश जाए तो इसे डिस्प्ले करूंगी।

ये रहे विजेता
एग्जीबिशन में पूर्णिमा महेश, गोल्ड, फाइकस वेरा बोनसाई, ओमेगा रैंक की ओर से आए एस.सुधाकर, गोल्ड और बेस्ट बोनसाई, दीपा प्रकाश, एक गोल्ड और एक सिल्वर, लैंडस्कैप, सुहाग पटेल, गोल्ड, पेंजिंग, स्मिता लुनावत, सिल्वर, फ्रूटिंग बोनसाई, सपना दास, सिल्वर, फ्रूटिंग बोनसाई, अनुष्का, सिल्वर, सोसाइकी विनर रहे।

एग्जीबिशन में ये रहे आकर्षण का केंद्र
शहरवासियों को एग्जीबिशन में फॉर्मल अपराइट, इनफॉर्मल अपराइट, स्लेटिंग स्टाइल, केसकेडिंग, सेमी-केसकेडिंग, विंडस्वेप्ट, डबल ट्रंक, मल्टी ट्रंक फॉरेस्ट स्टाइल, ग्रोइंग ऑ ए रॉक, मामे स्टाइल के बोनसाई देखने को मिले। एग्जीबिशन में मुंबई से आई साउथ एशिया बोनसाई फेडरेशन की अध्यक्ष स्नेह पाराशर और सचिव सुधीर जाधव ने बताया कि हमने विश्व में भारत के बोनसाई मास्टर्स को आगे बढ़ाया है। इस फेडरेशन के द्वारा बोनसाई को नए-नए रूप में काम करके बोनसाई लवर्स को जोडऩे की कोशिश कि जा रही है। इस अवसर पर क्लब की ओर से स्मारिका हरीतिमा का विमोचन भी किया गया।

पौधे को आधा सुखाकर तैयार होता है आइलैंड फाइकस
एग्जीबिशन में करीब 35 साल पुराना आइलैंड फाइकस डिस्प्ले किया गया है। इसके तने को आधा सुखाकर इसकी कटिंग की जाती है। तने में नीला थोता लगाया जाता है ताकि तने का पिछला हिस्सा जिंदा रहे। इसकी हाइट तीन से चार फीट तक रखी जाती है। फाइकस बिन 2 इंच के और लार्ज में 3 फीट तक की हाइट के होते हैं। वहीं, जूनिपर प्रजाति हिमालय में पाई जाने वाली एक प्रजाति का पेड़ है। इसकी हाइट पचास फीट से ज्यादा होती है। ठंडे इलाके का पेड़ होने के कारण बोनसाई को गर्मी से बचाकर रखना पड़ता है। लिपिस्टिक फाइकस पत्थर में ग्रोथ कर लेता है। विनिता गुप्ता ने यहां 13 साल पुराना लिपिस्टिक फाइकस एग्जीबिट किया है। ये कम पानी में भी सर्ववाइ कर सकता है।