12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

फोर्ब्स की 30 Under 30 एशिया लिस्ट में एमपी से तीन एंटरप्रेन्योर- खादीजी, द ऑप्टिमिस्ट सिटीजन, मुस्कान ड्रीम फाउंडेशन

सोशल एंटरप्रेन्योर कैटेगरी में 'खादीजी' की फाउंडर उमंग श्रीधर और मुस्कान ड्रीम फाउंडेशन के सीईओ अभिषेक दुबे, मीडिया, मार्केटिंग एंड एडवरटाईजिंग कैटेगरी में 'द ऑप्टिमिस्ट सिटिजन' को चुना गया

4 min read
Google source verification

भोपाल

image

Vikas Verma

Apr 03, 2019

forbes 30 under 30 asia 2019

forbes 30 under 30 asia 2019

भोपाल। फोर्ब्स ने अपनी '30 अंडर 30 एशिया' लिस्ट जारी कर दी है। चौथी बार जारी इस लिस्ट में 300 लोगों को जगह दी गई है। इस लिस्ट में उन युवाओं को शामिल किया जाता है जिन्होंने कुछ नया किया या फिर अपने ही क्षेत्र में हटकर काम किया हो। फोर्ब्स मैगजीन की इस लिस्ट में मप्र के तीन एंटरप्रेन्योर्स ने स्थान बनाया है। 'खादीजी' की फाउंडर उमंग श्रीधर, मुस्कान ड्रीम फाउंडेशन के सीईओ अभिषेक दुबे को सोशल एंटरप्रेन्योर कैटेगरी में और 'द ऑप्टिमिस्ट सिटिजन' को मीडिया, मार्केटिंग एंड एडवरटाईजिंग कैटेगरी में चुना गया है। तीनों को 11 जुलाई को हांगकांग इन्वॉइट किया गया हैं, जहां उन्हें अवार्ड दिया जाएगा।

पिछले चार सालों से फोर्ब्स चार रीजन की लिस्ट जारी करता है। इनमें एशिया, कनाडा, यूरोप और अमेरिका रीजन शामिल हैं। हर रीजन की लिस्ट में 10 कैटेगरी होती हैं। हर रीजन से करीब 2 हजार नॉमिनेशन होते हैं, यह नॉमिनेशन खुद फोर्ब्स के एडिटर या कोई सेलेब्रिट्री या पहले फोर्ब्स सूची में आ चुके लोग करते हैं। मप्र के तीनों नॉमिनेशन फोर्ब्स इंडिया की एडिटर अंबिका बहल ने किया था। फाइनल लिस्ट में हर रीजन से 300 लोगों को फाइनल किया गया है। फोर्ब्स ने इस साल विश्व भर से चार रीजन से 1200 लोगों को 10 कैटेगरी में यह अवॉर्ड दिया है।

खादीजी : आर्टिजन को दिया प्लेटफॉर्म, इनोवेटिव हैंडक्राफ्ट फैब्रिक तैयार करते हैं

उमंग श्रीधर ने दिल्ली यूनिसर्विटी से ग्रेजुएशन के बाद निफ्ट भोपाल से फैशन डिजायनिंग में डिप्लोमा किया। पिछले 12 सालों से भोपाल में हूं, मूलत: दमोह से हूं। मैंने वहां देखा कि समाज में गरीबी एक बड़ी समस्या है, निफ्ट से पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि ऐसा कुछ करना है जिससे गांव के स्किल्ड लोगों को हुनर के हिसाब से काम मिल सके। इसी उद्देश्य से खादीजी शुरू किया था। आर्टिजन से फैब्रिक लेकर उस पर डिजिटल प्रिंटिंग करने का प्लान किया।

कॉन्सेप्ट 2015 में आया और 2017 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर खादी पर डिजिटल प्रिंटिंग शुरू की। पहले साल 6 लाख की सेल की, दूसरे साल 40 लाख की सेल की और अब 3 करोड़ का टारगेट है। अब हम डिजिटल प्रिंटिंग की जगह इनोवेटिव हैंडक्राफ्ट फैब्रिक तैयार करते हैं जिसमें हम बैम्बू और सोयाबीन वेस्ट से बना धागा यूज करते हैं। अब हम आर्टिजन को एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहे हैं, जहां कोई भी बुनकर काम कर सकता है। यह एक तरह से ओला-उबर टैक्सी की तरह ही प्लेटफॉर्म है।

उदाहरण के तौर पर किसी कंपनी को बल्क में कोई फैब्रिक तैयार कराना है तो उसे महेश्वर, चंदेरी या अन्य जगहों पर जाकर यह देखने की जरूरत नहीं कि वहां लूम अवेलबल है या नहीं। हम खादी जी एप के माध्यम से सारी जानकारी उपलब्ध कराएंगे। फिलहाला रिलायंस और आदित्य बिड़ला गु्रप के साथ काम कर रहे हैं। अगले दो सालों में हमारा उद्देश्य देश भर के 1 लाख आर्टिजन तक पहुंचने का है। अभी हमारे पास मप्र के पांच क्लस्टर के करीब 300 आर्टिजन जुड़े हैं। उमंग ने बताया कि अभी हमारे पास 9 लोगों की टीम है। जो अटल इन्क्यूबेशन के तहत मंडीदीप में स्थापित आरटेक एआईसी में अक्टूबर 2018 से काम कर रही है।

द ऑप्टिमिस्ट सिटीजन : एक ऐसा अखबार जहां पब्लिश होती हैं सिर्फ मोटिवेशनल कहानियां

मीडिया, मार्केटिंग एंड एडवरटाईजिंग कैटेगरी में चयनित 'द ऑप्टिमिस्ट सिटीजन ' देश का पहला पॉजिटिव न्यूपेपर और न्यूज वेबसाइट है। जहां सिर्फ मोटिवेशनल स्टोरीज ही पब्लिश की जाती हैं। द ऑप्टिमिस्ट सिटीजन का कॉन्सेप्ट शुरू करने वाले तीन को-फाउंडर पीयूष घोष, तुहीन सेन और टेनीसन मैथ्यू हैं।

पीयूष बताते हैं कि हमनें अक्टूबर 2014 में यह न्यूज लेटर के तौर पर शुरू किया था। जुलाई 2015 में इसका रजिस्ट्रेशन कराया। दरअसल, जब भी हम अखबार पढ़ते थे तो उसमें नेगेटिव कंटेट बहुत होता था, वो कंटेट जानकारी के लिए जरूरी है लेकिन फैमिली मेंबर्स ऑल्टरनेट एजुकेशन से जुड़े थे तो कई ऐसे लोगों से मिलना होता था जिनकी कहानी बहुत इंस्पायरिंग थी। लिहाजा हमने सोचा क्यों ना न्यूपेपर और न्यूज वेबसाइट शुरू करें जिसमें ऐसे लोगों की कहानियों को सामने लाएं जो कॉमन मैन को मोटिवेट करती है।
हमारा न्यूज पेपर मंथली हैं, जिसका ई-पेपर भी पूरी तरह से पेड है साथ ही वेबसाइट पर कुछ कंटेट फ्री ऑफ कॉस्ट है और कुछ स्टोरीज पेड हैं।

मुस्कान ड्रीम फाउंडेशन : भोपाल समेत प्रदेश के 70 सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लास

अभिषेक दुबे ने भोपाल समेत ग्वालियर, डबरा, भितरवार और मुरार के 70 सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लास की शुरुआत की। एजुकेशन में इनोवेशन और बच्चों को स्कूल से जोडऩे के लिए उन्हें यह अवार्ड दिया जा रहा है। इंजीनियरिंग करने के दौरान शेल्टर होम जाकर अपने फ्रेंड्स के साथ बच्चों को पढ़ाया करता था। तब मुझे लगा कि गांवों में बहुत अधिक अशिक्षा है। पैरेंट्स अवेयर नहीं हैं और बच्चे भी पढऩा नहीं चाहते। तब मैं अपनी टीम को साथ गांव पहुंचा। साथ ही मुस्कान ड्रीम फाउंडेशन की शुरुआत की और आज उसी टीम की वजह से यह अपॉर्च्युनिटी मिली।

टीचर्स की कमी को देखते हुए हमने डिजिटल क्लास का प्लान बनाया और प्राइवेट कंपनी की मदद से हमें 70 स्कूल्स में डिजिटल क्लास बना सके। मुस्कान फाउंडेशन की टीम में कुल 200 वालंटियर्स हैं जो हर हफ्ते इन स्कूलों में विजिट करते हैं और वहां टीचर्स और स्टूडेंट्स से मिलते हैं। वे स्टूडेंट्स की संख्या, क्लास एक्टिविटी को मॉनिटर करते हैं। हमारा काम इन 70 स्कूल्स में जाकर टीचर्स को डिजिटल क्लास के लिए ट्रेंड करना है। इसके अलावा स्टूडेंट्स के अंदर अन्य स्किल्स डेवलप करते हैं।

इनमें उन्हें खेलकूद के साथ ही कम्प्यूटर चलाना, मेल करना, गूगल पर चीजों को सर्च करना आदि शामिल हैं। मुस्कान ड्रीम प्रोजेक्ट के हम 5 साल में 10 हजार सरकारी स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम बनाना है और 10 लाख बच्चों तक पहुंचना है।