
वन मंडल का अनोखा संदेश, बर्बाद पानी को सहेज बुझा रहे वन्यजीवों की प्यास
नोडल अधिकारी ने बताया हल बरखेड़ा से बुदनी के बीच डाली जा रही २३ किलोमीटर लम्बी तीसरी रेलवे लाइन के निर्माण के दौरान मिडघाट के वन्य क्षेत्र में निर्माण गतिविधियां हो रही है।
निर्माण कार्य के दौरान वन्य क्षेत्र को नुकसान न पहुंचे इसके लिए वन विभाग की ओर से सीसीएएफ डॉ.़ एसपी तिवारी को नोडल आफिसर बनाया गया है। तिवारी ने पिछले दिनों निर्माण स्थल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने रेलवे लाइन के लिए बड़े इलाके में पहाड़ काटे जाने से निकले पत्थर देखे। निर्माण कम्पनी इन पत्थरों को निर्माण स्थल से दूर फिंकवाने की तैयारी कर रही थी।
इस पर सीसीएफ ने इन पत्थरों से स्टाप डेम बनवाने का प्रस्ताव रखा, जिसे कम्पनी के अधिकारियों ने तुरंत स्वीकार कर लिया। निर्माण कम्पनी पहुंचाएगी, वन विभाग करेगा निर्माण स्टाप डेम के निर्माण के मिडघाट के जंगलों में दो जगह तय कर ली गई है। पहले चरण में गडरिया नाले के सहायक बरसाती नालों में दो जगहों पर स्टाप डेम बनाने का प्रस्ताव बनाया गया है। ओबेदुल्लागंज वन मंडल के अधिकारियों ने डेम के लिए दो जगहें भी चिन्हित हैं। चयनित स्थानों तक पत्थर निर्माण कम्पनी पहुंचाएगी।
जिनके उपयोग से वन विभाग स्टाप डेम बनवाएगा। दरअसल मिडघाट में बरसात में पहाड़ों से कई झरने फूटते हैं, लेकिन बरसात खत्म होते ही नाले सूख जाते हैं जिसके चलते गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को पानी के लिए जूझना पड़ता है, लेकिन स्टाप डेम बन जाने के बाद वन्य प्राणियों को गर्मियों के मौसम तक पेयजल मिल सकेगा।
'थर्ड लाइन के निर्माण से बड़ी मात्रा में पत्थर निकले हैं, जिनका उपयोग कर स्टॉप डेम बनाने की योजना बनाई गई है। जगह चिन्हित कर ली गई है, जल्द निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इस मानसून के पूर्व डेम बनकर तैयार हो जाएंगे जिनमें बरसात का पानी रोका जा सकेगा। डेम बन जाने पर वन्य जीवों के लिए गर्मियों तक पेयजल की व्यवस्था हो जाएगी। Ó डॉ. एसपी तिवारी, सीसीएफ
Updated on:
21 Apr 2019 07:22 am
Published on:
21 Apr 2019 07:22 am
