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दे​खिए कैसे केरवा के जंगल में अब बाघ के लिए लगी जाली तोड़कर अंदर हो रही पेड़ों की कटाई

जाली हटने और अंदर गैर वनीय घटनाएं बढ़ने से बार-बार शहर में घुस रहे वन्य जीव

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भोपाल

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Sunil Mishra

Apr 06, 2022

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भोपाल. राजधानी में केरवा-कलियासोत के घने जंगलों का उजाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। जबकि यहां बाघ भ्रमण करते हैं। बाघों को बाहर आने से रोकने के लिए यहां जाली लगाई गई है। लेकिन अब जाली को हटाकर भी अंदर के पेड़ काटे जा रहे हैं। यही नहीं रात में छोटे पेड़ों को जेसीबी से कुचलकर नष्ट किया जा रहा है। दिन में जाली फिर से बंद कर दी जाती है। यहां पर किसी प्रोजेक्ट के आने की संभावना जताई जा रही है।
केरवा के जंगल में 11 शटर के बगल से जाने वाले रास्ते पर बाघ को बाहर आने से रोकने के लिए वन विभाग ने करीब 12 किमी क्षेत्र में एक करोड़ की लागत से जाली लगवाई है। लेकिन इस जाली को खेतों के पास से काट दिया गया और रात में जेसीबी मशीनें चलाई जा रही हैं। इस संबंध में एनजीटी में वन क्षेत्र नष्ट होने का केस लगाने वाले राशिद नूर खान ने वन विभाग के अधिकारियों को शिकायत की। इसके बाद यह जाली दोबारा बंद करवा दी गई। लेकिन पेड़ अभी भी कटे हुए हैं। इसके साथ जेसीबी से कुचले हुए पेड़ भी दिखाई दे रहे हैं। खान ने बताया कि संरक्षित वन घोषित होने के बाद तो यहां पर किसी भी प्रकार की गतिविधि जंगल में नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद जंगलों को लगातार खत्म किया जा रहा है। ऐसा लगता है किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए जंगल साफ किया जा रहा है।

मिट्टी और पत्थर की खुदाई भी
केरवा के जंगलों में मिट्टी और पत्थरों की भी लगातार खुदाई चल रही है। नगर वन बनाने के लिए ट्रैक्टरों से जंगल के अंदर से ही मिट्टी लाई जा रही है। इस संबंध में जब ट्रैक्टर चालक से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि साहब ने बोला है वन विभाग के काम के लिए ही मिट्टी ले जाई जा रही है।

अप्रैल 2021 में जला दिया था तीन हेक्टेयर जंगल

कलियासोत से सटे चंदनपुरा इलाके में 21 अप्रैल की सुबह 10.30 बजे निजी जमीन क्षेत्र के वृक्षों में आग लग गई थी। देखते ही देखते आग बाघ भ्रमण वाले क्षेत्र तक पहुंच गई और करीब तीन हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गया था। इसकी सूचना देने वाले ग्रामीणों के अनुसार जहां आग लगी थी वहां पर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई थी। इन कटे हुए पेड़ों को छिपाने के लिए किसी ने जानबूझकर आग लगाई होगी।

जाली कटने से बाहर आ रहे वन्य जीव

चंदनपुरा के जिन इलाकों में जंगल कटाई की गई वहां बाघ और शावकों का मूवमेंट है। पेड़ कटाई और आग की घटनाओं से दोनों के जीवन पर विपरीत असर पड़ता है। जाली कटने से वन्य जीव शहर में भी घुस रहे हैं। हाल ही में बाघ, तेंदुआ, चीतल आदि के शहर में घुसने की घटनाएं हो भी चुकी हैं। इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।