नागरिक सहकारी बैंक के संचालकों के खिलाफ सहकारिता विभाग में शिकायत हुई थी। इसमें कहा गया था, बैंक के संचालक बालकृष्ण शुक्ला के भाई कृपाशंकर शुक्ला को 14.51 लाख रुपए बकाया होने के बाद भी लोन स्वीकृत कर दिया था। बैंक की आमसभा में भी इस लोन के संबंध में जानकारी नहीं दी गई थी। इसकी शिकायत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी की गई थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इसके बाद बैंक के संचालकों पर 5 लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया था। मामले में सहकारिता विभाग ने संस्था के तत्कालीन संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। सभी संचालकों के जवाब अमान्य करते हुए संयुक्त आयुक्त सहकारिता ने शनिवार को अपना फैसला सुनाया। उन्होंने बैंक को नुकसान पहुंचाने के लिए सभी 13 संचालकों को दोषी करार दिया।