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9 दिन से घाटा झेल रही महामना, कोई नहीं जाना चाहता खजुराहो

13 जुलाई से भोपाल-खजुराहो के बीच शुरू की गई ट्रेन को नहीं मिल रहे यात्री,  खाली जा रही हैं 70 प्रतिशत सीटें

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Sumeet Pandey

Jul 22, 2017

bhopal

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भोपाल
. 13 जुलाई को भोपाल से खजुराहो के बीच शुरू की गई महामना एक्सप्रेस रेलवे के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। नौ दिन गुजर जाने के बावजूद इसकी 70 प्रतिशत सीटें खाली जा रही हैं। एेसे में घाटे से बचने के लिए रेलवे ने ट्रेन से सेकंड सिटिंग के चार कोच हटाने का निर्णय लिया है। 25 जुलाई से महामना एक्सप्रेस 10 कोच की चलेगी। अभी ट्रेन में 14 कोच हैं।

बता तें 13 जुलाई को रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने गाड़ी संख्या 01263 भोपाल खजुराहो महामना एक्सप्रेस को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। राजधानी भोपाल से 15 जुलाई से यह ट्रेन गाड़ी संख्या 22163/22164 भोपाल-खजुराहो-भोपाल नियमित गाड़ी के रूप में चली थी। ट्रेन में अभी कुल 14 कोच हैं। इनमें 09 कोच सेकंड सिटिंग,01 एसी चेयरकार, 02 सामान्य कोच और 02 एसएलआर कोच हैं। इनमें सेकेंड सिटिंग की और एसी चेयरकार की कुल सीटों की संख्या लगभग 1045 है। रेलवे के आरक्षण कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार सेकंड सिटिंग कोच और एसी चेयरकार दोनो को मिलाकर प्रतिदिन बमुश्किल 300 से 350 आरक्षण होते हैं। शेष सीटें खाली जाती हैं।



स्टेशन और टाइमिंग दोनों गलत

रेलवे के जानकारों के अनुसार भोपाल रेलमंडल द्वारा शुरू की गई महामना एक्सप्रेस का स्टेशन और उसकी टाइमिंग दोनो गलत हैं। ट्रेन को सुबह की जगह रात में चलाया जाना चाहिए था। कारण कि रेलवे ने इस ट्रेन को मुख्यरूप से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन खजुराहो के लिए चलाया है। सुबह 06.50 बजे चलने वाली यह ट्रने दोपहर 01.30 बजे खजुराहो पहुंचती है। एेसे में घूमने जाने वाले पर्यटक का आधा दिन तो ट्रेन में ही निकल जाता है। इसके बाद यदि पर्यटक को खजुराहो से भोपाल आना है तो उसे अगले दिन का इंतजार करना होगा। क्यों कि खजुराहो से यह ट्रेन दोपहर 04.15 बजे है जो कि रात 10.55 बजे भोपाल पहुंचती है। और केवल 02 से 03 घंटे में कोई भी पर्यटक खजुराहो को घूमकर वापस नही आ सकता। यही कारण है कि यात्री इस टे्रन में जाना नहीं चाह रहे।


वहीं दूसरे बड़ी गड़बड़ी ट्रेन के स्टेशन को लेकर है। अगर यह ट्रेन हबीबगंज से चलाई जाती तो ट्रेन को अधिक संख्या में यात्री मिलते। एक कारण यह है कि होशंगाबाद रोड, कोलार, मिसरोद, क्षेत्र में बड़ी संख्या में बुंदेलखंड में रहने वाले लोग हैं। जो कि छतरपुर, टीकमगढ़, खजुराहो आदि के रहने वाले हैं।