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आदिवासी इलाकों डॉक्टरों को अतिरिक्त वेतन और घर-बिजली-कार खर्च फ्री

- कैबिनेट फैसले : मुख्यमंत्री सुषेण चिकित्सा प्रोत्साहन योजना में किए नए प्रावधान, बीस आदिवासी बाहुल्य जिलों में होगी यह व्यवस्था

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cabinet briefing karate mantri pc sharma or govind Singh rajpoot.

abinet briefing karate mantri pc sharma or govind Singh rajpoot.

भोपाल/ प्रदेश के अत्यधिक पिछड़े व पिछड़े आदिवासी विकासखंडों में अब सरकारी डॉक्टरों को नौकरी करने पर अतिरिक्त वेतन के साथ आवास, बिजली और आना-जाना फ्री किया जाएगा। आदिवासी इलाकों के लिए इन डॉक्टर्स को करीब चालीस फीसदी अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट बैठक में यह व्यवस्था तय की गई है। इसमें मुख्यमंत्री सुषेण चिकित्सा प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई। इसके तहत २० अति पिछड़े व पिछड़े आदिवासी बाहुल्य जिलों के ब्लॉक में सरकारी डॉक्टर्स के लिए अतिरिक्त वेतन सहित अन्य सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। अब पीजी डॉक्टर को 60 हजार की जगह एक लाख रुपए मिलेंगे।

वहीं वेतन 50 हजार से बढ़कर 90 हजार रुपए हो जाएगा। हर चिकित्सक ग्रेड के लिए अलग से अतिरिक्त वेतन की व्यवस्था होगी। इसके अलावा हर ब्लॉक पर दो सरकारी कारों की व्यवस्था की जाएगी, जो जिलों के संबंधित डॉक्टर्स को अस्पताल लाने व छोडऩे के लिए रहेगी। कार-पूलिंग के तहत यह व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा इन डॉक्टर्स को रहने और बिजली का खर्च भी देगी।

सीएम बोले, एक साल बाद भी गांवों में डॉक्टर क्यों नहीं

कैबिनेट में गांवों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हमारी सरकार को एक साल हो गया। अब तक गांवों में डॉक्टर क्यों नहीं है। ये कौन करेगा। इस पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधो ने सफाई देते हुए कहा प्रारुप तैयार कर लिया है, इसे जल्द लागू कर देंगे।

उन्होंने बताया कि अब पीजी व एमबीबीएस डॉक्टर को एक साल गांव में नौकरी करना अनिवार्य होगा। इस पर ही उसे एमआईसी से डॉक्टर का पंजीयन होगा। गांव में एक साल नहीं बीतता है, तो हम एमआईसी से पंजीयन रद्द करा देंगे। इसकी पूरी व्यवस्था कर रहे हैं। इसमें बांड सिस्टम भी नहीं रहेगा। इस पर सीएम ने कहा कि जल्द इसे लागू करो।

ये भी हैं पांच बड़े फैसले-

हेल्थ केयर पॉलिसी : सरकार ने नई हेल्थ केयर पॉलिसी को मंजूरी दी है। इसके तहत छोटे शहरों में बड़े अस्पताल खोलने के लिए विशेष छूट रहेगी। मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल ग्रेड-1 के लिए 30 बिस्तर से 90 बिस्तर और मल्टी स्पेशलिटी ग्रेड टू अस्पताल के लिए सौ से ज्यादा बिस्तर होना अनिवार्य किए जाएंगे। सरकारी मदद शहरों को तीन श्रेणियों में मिलेगी। इसमें ब व स श्रेणी के शहरों के लिए रियायती भूमि का मूल्य 75 फीसदी होगा। मेडिकल कॉलेज के लिए यह सौ फीसदी रहेगी। इसके अलावा भी कई प्रावधान किए गए हैं। कर्मचारी आयोग


पोषण आहार के प्लांट : सरकार ने आजीविका मिशन के सात पोषण आहार उत्पादन प्लांटों को एमपी एग्रो इंड्रस्टीज को देने की हरी झंडी भी दे दी। प्रदेश में मिड-डे मिल के तहत रेडी-टू-फूड इन प्लांट्स से पोषण आहार दिया जाना है। इसमें दो प्लांट दिसंबर में शुरू होना है। आजीविका मिशन ने लिखकर दे दिया था कि वह इन प्लांट्स के संचालन में सक्षम नहीं है।

इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ ने यह संचालन महिला स्व-सहायता समूहों के जरिए कराने के आदेश दिए थे, लेकिन अब सरकार ने महिला स्व-सहायता समूहों के तहत संचालित होने वाले इन प्लांट्स को ही एमपी एग्रो को दे दिया है। पूर्व में शिवराज सरकार के समय एमपी एग्रो को ही पोषण आहर घोटाले के लिए जिम्मेदार माना था।

तीन साल नहीं मिलेगा पूरा वेतन : सरकार ने एमपी-पीएससी के अलावा अन्य तृतीय व चतुर्थ वर्ग की भर्ती के लिए तीन साल का प्रोबेशन पीरियड कम वेतन का तय कर दिया है। इसके तहत पहले साल 90, दूसरे साल 80 और तीसरे साल 90 फीसदी वेतन मिलेगा। अब चौथे साल स्थाई होने पर ही पूरा वेतन मिलेगा। इस प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इसमें व्यापमं सहित अन्य विभागों से होने वाली भर्ती शामिल रहेगी।

आदिवासी क्षेत्र में लैंड-डायवर्सन को मंजूरी : कैबिनेट में भू-राजस्व संहिता में संशोधन करके आदिवासी अधिसूचित क्षेत्र में गैर-आदिवासी व्यक्ति की जमीन को दस साल के पहले ही लैंड-यूज का डायवर्सन कराने की मंजूरी दे दी है। अभी दस साल के पहले कोई भी लैंड-यूज का डायवर्सन नहीं करा सकता है। अब डायवर्सन को मंजूरी देने के साथ इसके लिए जुर्माने के प्रावधान को भी हटा दिया गया है।

गौण खनिज की रॉयल्टी 20 फीसदी बढ़ी : सरकार ने गौण खनिज की रॉयल्टी को बीस फीसदी बढ़ाने की मंजूरी भी बैठक में दे दी। इसके तहत गिट्टी-मुर्रम पर बीस फीसदी रॉयल्टी ज्यादा लगेगी। वही डेड-सेंड खदान के लिए दो साल बाद दो लाख रुपए की लायसेंस फीस रहेगी, ताकि खदान संचालक केवल लायसेंस लेकर ही खदान बंद करके न रखे। वह खदान संचालित करें या फिर सरेंडर कर दें। पत्थर से बनने वाली रेत की रॉयल्टी ५० रुपए घन-फीट कर दी गई है। इसमें अजजा-जजा वर्ग सहित अन्य छूट पूर्ववत रहेगी।