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डॉ€क्टर-टीचर से लेकर पुलिस तक करेगी आत्महत्या का प्रयास करने वालों की मदद

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: आत्महत्या रोकने के लिए 18 विभाग मिलकर करेंगे काम, पहली बार बनी कमेटी, 15 सितंबर को होगी पहली बैठक

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भोपाल। आत्महत्या के मामले में मध्यप्रदेश टॉप-3 राज्यों में शुमार रहा है। यहां हर साल सुसाइड केस में वृद्धि हो रही है। पिछले साल करीब 10 हजार लोगों ने अलग-अलग कारणों ने अपनी जान गंवाई। इन मौतों पर रोक लगाने के लिए अब 18 विभाग मिलकर काम करेंगे। सरकार ने मप्र आत्महत्या रोकथाम रणनीति समन्वय समिति का गठन किया है। एनएचएम के प्रस्ताव के बाद पहली बार इस तरह की कमेटी का गठन आत्महत्या रोकने के लिए किया गया है। मप्र उन चुनिंदा राज्यों में शामिल, जहां कमेटी बनाई गई है।

पुलिसकर्मी अभी भी दिखाते हैं कानून का डर

प्रदेश में आत्महत्या के मामले करीब तीन प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार ने आत्महत्या करने की कोशिश करने वाले लोगों की मन:स्थिति को देखते हुए कानून में बदलाव किया था। जिसके तहत अब ऐसा कदम उठाने वालों के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया जाता। पुलिसकर्मी ऐसे लोगों की काउंसलिंग कर मदद करने की बजाए अब भी उन्हें कानून का डर दिखाते हैं। पहले से पीडि़त व्याप्त और खौफजदा हो जाता है और अपने मन की बात कह नहीं पाता। वो फिर से सुसाइड जैसा घातक उठा लेता है। अब फील्ड में तैनात जिले के अधिकारियों को ट्रेनिंग देकर इस बारे में बताया जाएगा, क्योंकि घटना होने पर सबसे पहले पुलिस ही पहुंचती है। उन्हें बताया जाएगा कि उन्हें पीडित की किस तरह से मदद करनी है।

कृषि विभाग भी होगा रणनीति में शामिल

इस कमेटी के अध्यक्ष स्वास्थ्य विभाग के एसीएस होंगे। एनएचएम के प्रस्ताव के बाद कमेटी में 18 विभागों को शामिल किया गया। इसमें कृषि विभाग को भी जोड़ा गया है, €योंकि अधिकांश मामलों में सुसाइड के बारे में सोचने वाला व्याप्त सल्फास या अन्य ऐसी सामग्री खाता है जो कृषि कार्यों में उपयोग होती है। कृषि विभाग से इस रणनीति बनाने पर मंथन होगा कि इन चीजों की उपलŽधता को कैसे रोका जा सकता है। इससे पहले मप्र में बनाई गई एक कमेटी ने कृषि कार्यों के लिए एक अलग बैंक बनाने का सुझाव दिया था, जहां से सिर्फ किसान ही जरूरत होने पर इन्हें खरीद सकते थे।

मन केंद्र में मिलेगी मदद

अभी आत्हत्या का प्रयास करने वाला व्याप्त इलाज के लिए अस्पताल आता है, यहां डॉक्टर्स उसका इलाज तो कर देते हैं, लेकिन उसकी काउंसलिंग पर ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में घटना फिर से होने का डर होता है। अब डॉक्टर व स्टाफ को ट्रेंड किया जाएगा। वे मन क्लनिक की मदद से ऐसे मरीजों की काउंसलिंग कराएंगे ताकि उनकी परेशानी को समझा जा सके। नशे के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए नारकोटि€क्स विभाग को भी जोड़ा जाएगा।