
ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। भोपाल एम्स में अब ब्रेन ट्यूमर का इलाज गामा नाइफ जैसी अत्याधुनिक तकनीक से संभव होगा। एम्स प्रबंधन ने गामा नाइफ तकनीक शुरू करने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है उम्मीद की जा रही है कि एक साल में यह सुविधा भोपाल एम्स में शुरू हो जाएगी। मालूम हो कि गामा नाइफ तकनीक भोपाल एम्स सहित देश के चार अस्पताल में ही उपलब्ध है। इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि यह मस्तिष्क में छुपे कैंसर कारक ट्यूमर को खुद खुलता है और उसे खत्म कर देता है। एम्स प्रबंधन के मुताबिक गामा नाइफ तकनीक आ जाने के बाद एम्स भोपाल में देशभर के मरीज इलाज कराने आएंगे।
यह होगा फायदा
जानकारी के मुताबिक गामा कैमरा के पूरे सेट की कीमत करीब 50 करोड़ रुपए के आसपास है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ऑपरेशन के बाद संक्रमण रेडियस 0.01 प्रतिशत ही रह जाता है। इसमें ब्रेन की ट्रेडिंग वेन यानी खून ले जाने वाली शिरा को छेड़े बिना सीधे टयूमर पर निशाना लगा कर गामा किरणों से उसे सुखा दिया जाता है। इससे ब्रेन में ना सूजन आएगी ना घाव होगा ना ही मरीजों को ब्रेन हेमरेज का खतरा होगा।
हर महीने 10 से 15 मरीज
भोपाल एम्स में अभी हर महीनें 10 से 15 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं जिन्हें ब्रेन ट्यूमर की शिकायत हैं। इन मरीजों को या तो ओपन सर्जरी करानी पड़ती है या फिर दिल्ली और अन्य अस्पतालों में भेजा जाता है । गामा नाइफ तकनीक आने के बाद की सभी मरीजों का ऑपरेशन भोपाल में ही संभव होगा
क्या है गामा नाइफ
गामा नाइफ अडवांस रेडियोथेरपी प्रसीजर है। यह अधिकतर नसों में मौजूद ट्यूमर खासकर ब्रेन ट्यूमर के लिए इस्तेमाल की जाती है। इस रेडियोथेरपी के माध्यम से रेडिएशन केवल ट्यूमर पर दिया जाता है, जिससे कैंसर सेल के अंदर मौजूद डीएनए नष्ट हो जाते हैं। कैंसर सेल का खतरा इस इलाज के बाद एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में कैंसर जाने का खतरा भी नहीं रहता। इस रेडिएशन की वजह से ट्यूमर भी नष्ट हो जाता है। मरीज को किसी प्रकार का चीरा लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ती है।
इन बीमारियों में होगा इस्तेमाल
- ब्रेन ट्यूमर- ब्रेन कैंसर- ट्रिगमाइनल न्यूरेलजिया (नस की बीमारी)- एकोस्टिक न्यूरोमा (नस की बीमारी)-------------------
Published on:
12 Apr 2019 12:18 pm
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