
महात्मा गांधी से जुड़ी वो बातें, जिन्हें बहुत कम लोग ही जानते हैं
भोपाल/ 02 अक्टूबर 2019 यानी पूरा भारत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगाठ के रूप में जश्न मना रहा है। जगह जगह आयोजनों के जरिये महात्मा गांधी के जीवनमंत्रों को याद किया जा रहा है। साथ ही उनके आदर्शों पर चलने का प्रण लिया जा रहा है। 02 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में जन्में मोहनदास करमचंद गांधी का देश को अंग्रेजों से मुक्ति दिलाने में अतुल्य योगदान रहा। अपने जीवनकाल में उन्होंने सदेव लोगों को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया। उनके स्नेह और देशवासियों से प्रेम के कारण आज भी हर देशवासी उन्हें प्रेम से बापू के नाम से जानता है।
वैसे तो गांधी जी के जीवन को आदर्श के रूप में देखा जाता है, जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है। लगभग सभी लोग गांधी जी के जीवन से जुड़ी कई बातें जानते हैं। लेकिन, उनके जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें भी है, जो या तो बहुत कम लोगों को मालूम ये या फिर उनके सिर्फ कुछ खास लोगों को ही मालूम है। तो आइये जानते हैं ऐसी ही अनसुनी और खास बातें।
दो बार झीलों की नगरी आए थे बापू
वैसे देश को आज़ादी दिलाने के लिए गांधी जी ने पूरे भारत की यात्रा की लेकिन, उनकी कुछ यादें नवाबों के शहर भोपाल से भी जुड़ी हैं। आज से करीब 90 साल पहले महात्मा गांधी पहली बार भोपाल आए थे। सबसे पहले 1929 में महात्मा गांधी भोपाल प्रवास पर आए थे। इसके बाद अगली बार भोपाल वासियों को उनके दर्शन करने का मौका 1933 में मिला था। भोपाल आकर बापू जहां जहां गए, आज भी उनकी यादें वहां से जुड़ीं हुई हैं। ये बात बहुत कम ही लोग जानते हैं कि, बापू कभी भोपाल भी आए थे, लेकिन दो बार भोपाल प्रवास पर आए गांधी जी शहर की राहत मंजिल, बेनजीर ग्राउंड, मोढ़ों की बगिया और भोपाल रेलवे स्टेशन पर आ चुके हैं। यहां गांधी जी ने प्रार्थना सभा और जनसभा को संबोधित भी किया था। ये तो हुई गांधी के भोपाल से नाते की बात, जिसके बारे में बहुत कम ही लोगों को पता है। अब हम बताते हैं बापू से जुड़ी कुछ अन्य अनसुनी बातें।
बापू से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें
-गांधी को सबसे ज्यादा प्रेरित किया अमेरिका के प्रसिद्ध दार्शनिक हेनरी डेविड थारो (1817-1862) ने। थोरो एक अमेरिकी ट्रांससीन्डेन्टलिस्ट, प्रकृतिवादी और राजनीतिक कार्यकर्ता थे। जिन्हें अपनी पुस्तक वाल्डेन और निबंध 'सिविल असहयोग' के लिए लिए जाना जाता है। महात्मा गांधी का 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' इन्हीं से प्रेरित था। थोरो को ये प्रेरणा इमर्सन के द्वारा भारतीय दर्शन से मिली थी।
-महात्मा गांधी का कहना था कि, वैसे तो अपने सामने आने वाले हर शख्स और घटना से कुछ न कुछ ज़रूर सीखने का प्रयास करते थे। लेकिन अपने जीवन में उन्हें भगवान महावीर, महात्मा बुद्ध और भगवान श्रीकृष्ण पसंद थे। उनके पास हमेशा गीता रहती थी, जबकि वे महावीर स्वामी के पंचमहाव्रत और महात्मा बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अपने जीवन में पालन करते थे।
-महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को दो लोग पसंद थे महान मानवतावादी अल्बर्ट श्वाइटज़र और अहिंसा के समर्थक महात्मा गांधी। आइंस्टीन ने कहा था- ‘पश्चिम में अकेले अल्बर्ट श्वाइटज़र ही ऐसे हैं जिनका इस पीढ़ी पर उस तरह का नैतिक प्रभाव पड़ा है, जिसकी तुलना गांधी से की जा सकती हो। आइंस्टीन और महात्मा गांधी के बीच भी कभी कभार पत्राचार के माध्यम से बात होती थी।
-महात्मा गांधी के दूसरे प्रिय लेखक लियो टॉलस्टॉय थे। गांधी जी हमेशा उनसे पत्र व्यवहार के माध्यम से जुड़े रहे। गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह संघर्ष के दौरान, जोहांसबर्ग से 21 मील दूर एक 1100 एकड़ की छोटी सी कालोनी में टॉलस्टॉय फार्म स्थापित किया था।
-अमेरिका के महात्मा गांधी कहे जाने वाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर भी महात्मा गांधी से काफी प्रेरित थे। अपनी आत्मकथा में मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपने विचारों और कार्यों का ज्यादा श्रेय महात्मा गांधी को दिया। 1955-56 में किंग जूनियर की भागीदारी वाला प्रसिद्ध मांटगोमरी बस बहिष्कार आंदोलन महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन और सत्याग्रह से ही प्रेरित था। इसके अलावा, साउथ अफ्रीका का नेल्सन मंडेला भी गांधी से खासे प्रभावित थे। उन्हें अब भी दूसरा गांधी ही कहा जाता है।
-वैसे तो महात्मा गांधी अंग्रेजी बोलना जानते थे, उन्हें ये भाषा उनके आयरलैंड के साथी ने उन्हें सिखाई थी, लेकिन गांधी जी हमेशा अंग्रेजी बोलने से बचते रहे, किसी जरूरी मौके पर वो सामान्य अंग्रेजी में बात किया करते थे। हालांकि, भारत स्वतंत्र होने के बाद कुछ अंग्रेज पत्रकार गांधी जी का इंटरव्यू लेने आए थे, उन्होंने अंग्रेजी में बापू से कुछ सवाल किये, जिसका जवाब देने से पहले बापू ने कहा- 'मेरा देश अब आजाद है, अब मैं हिंदी में ही बात करूंगा।'
-महात्मा गांधी ने कई किताबें और लेख लिखे, लेकिन हकीकत में उनकी हेंडराइटिंग बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी, हालांकि जब भी समय मिलता वो अपनी हेंडराउटिंग में सुधार करने का प्रयास करते रहते थे और इसे लेकर चिंचित भी थे, लेकिन समय का अभाव होने के कारण वो कभी नियमित रूप से अपनी राइटिंग पर ध्यान नहीं दे पाए। आज भी कई खराब राइटिंग वाले लोग गांधी जी राइटिंग का हवाला देकर खुद को बचाने में सफल हो जाते हैं।
-वैसे तो महात्मा गांधी ने अपनी ज्यादातर यात्राएं पैदल ही की हैं, लेकिन आमतौर पर भी गांधी जी रोज़ाना 18 किलोमीटर पैदल चलते थे। इस हिसाब से अगर अंदाज़ा लगाया जाए तो, बापू अपने जीवन में आमतौर पर जितना चले हैं, अगर उसे जोड़ दिया जाए, ये धरती का दो बार चक्कर लगाने के बराबर है। वे अपनी सेहत के प्रति सजग थे और 110 वर्ष जीना चाहते थे। वह अपने पेट की गर्मी छांटने के लिए उस पर गिली मिट्टी की पट्टियां बांधते थे।
-गांधी जी ने अपने जीवनकाल में कभी भी अमेरिका का दौरा नहीं किया और ना ही कभी हवाई यात्रा की। गांधीजी को फोटो खिंचवाने का बिलकुल भी शौक नहीं था, लेकिन आजादी के दौरान सबसे ज्यादा उनके ही फोटो खींचे गए थे।
-रेलयात्रा के दौरान एक बार महात्मा गांधी का एक जूता ट्रेन से नीचे गिर गया था, उन्होंने तुरंत ही दूसरा जूता भी नीचे फेंक दिया। साथ में मौजूद यात्री ने जब दूसरा जूता फेंकने का कारण पूछा तो, गांधी जी ने जवाब दिया कि, जो जूता मुझसे छूटकर गिर गया, वो अब मुझे तो मिलेगा नहीं और ना ही वो बचा हुआ जूता मेरे किसी काम का था। अब जिे भी ये जूते मिलेंगे तो कमसे कम उसके पहनने के काम तो आ ही जाएंगे।
Published on:
02 Oct 2019 04:25 pm
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