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एमपी में नए निगम-मंडल बनाएगी सरकार, मंत्रिमंडलीय समिति का बड़ा फैसला

MP Nigam- 12 चरण के बाद शेष बचीं 489 दुकानें नीलामी के बाद बची शराब दुकानों को चलाने सरकार बनाएगी निगम-मंडल...।

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Government to establish new corporations and boards in MP

Government to establish new corporations and boards in MP- CM Mohan Yadav- File pic

MP Nigam- मध्यप्रदेश में राज्य सरकार नए निगम मंडल गठित करेगी। खास बात यह है कि शराब दुकानों का संचालन करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। नए निगम मंडल प्रदेश में शराब दुकानें चलाएंगे। मंत्रिमंडलीय स्तरीय समिति में यह निर्णय लिया गया है। गौरतलब है कि प्रदेश में पूर्व में कई निगम-मंडलों को बंद किया जा चुका है। वर्तमान में अनेक निगम-मंडलों की माली हालत बेहद खराब है। निगम-मंडलों में अध्यक्ष नहीं हैं, विभागीय मंत्री ही इनका प्रभार संभाल रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडलीय स्तरीय समिति में अहम निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश की शराब दुकानों के संचालन के लिए निगम मंडल बनाने की बात कही गई है। पहले साल में निगम मंडल 489 दुकानों का संचालन करेगा। ये वे दुकानें हैं, जो 12 चरणों की नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद नहीं बिकीं। आने वाले वर्षों में इन दुकानों की संख्या बढ़ या घट सकती है।

नया गठित होने वाला निगम मंडल आबकारी विभाग के अधीन होगा

नया गठित होने वाला निगम मंडल आबकारी विभाग के अधीन होगा। शराब दुकानों के संचालन के लिए अलग से नीति बनेगी। निगम मंडल का पूरा सेटअप होगा। इसके संचालन और क्रियान्वयन के लेकर भी गाइडलाइन तैयार होगी। बैठक में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर अमित राठौर, आयुक्त आबकारी दीपक कुमार सक्सेना मौजूद रहे।

21 साल पहले बंद हुआ सड़क विकास निगम, करोड़ों रुपए के घाटे के बाद इसे बंद कर दिया गया

बता दें कि प्रदेश में 40 से अधिक निगम मंडल है, इनमें अध्यक्ष नहीं है। विभागीय मंत्रियों के पास ही प्रभार है। कई की तो हालत ठीक नहीं है। पूर्व में ऐसे कई निगम मंडलों को बंद किया जा चुका है। इनमें सबसे चर्चित सड़क विकास निगम था, जो परिवहन सुविधाओं के लिए काम करता था। करोड़ों रुपए के घाटे के बाद इसे बंद कर दिया गया था।

तब के कुछ अफसरों व नेताओं के कारण यह घाटे में गया और तत्कालीन सरकार ने इस पर 2005 में ताला लगा दिया था

सड़क विकास निगम के तहत सरकारी बसों का संचालन होता था। तब के कुछ अफसरों व नेताओं के कारण यह घाटे में गया और तत्कालीन सरकार ने इस पर 2005 में ताला लगा दिया था। अब मोहन सरकार फिर से लोक परिवहन सेवा को पटरी पर लाने का प्रयास कर रही है हालांकि इसमें अब तक सफलता प्राप्त नहीं हुई है।