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Ganesh Chaturthi 2023: ‘ज्ञान की पाठशाला’ है बप्पा का शरीर, सभी अंग देते हैं जीवन जीने की सीख, जानिए क्या है मतलब

Ganesh Chaturthi 2023: गणेश पुराण के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्रमास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इसलिए हर साल इस तिथि को गणेश उत्सव मनाया जाता है। श्रीगणेश को सभी देवों में प्रथम पूज्य माना जाता है। शिवगणों के अध्यक्ष होने के कारण इन्हें गणेश और गणाध्यक्ष भी कहा जाता है। भगवान श्री गणेश मंगलमूर्ति भी कहे जाते हैं, क्योंकि इनके सभी अंग जीवन को सही दिशा देने की सीख देते हैं। जानिए किस अंग से हमें क्या सीख मिलती है.....

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Ganesh Chaturthi 2023

ज्ञान की पाठशाला हैं गणपति के अंग

एकदंत- पौराणिक कथा के अनुसार बाल्यकाल में भगवान गणेश का परशुराम जी से युद्घ हुआ था। इस युद्घ में परशुरामजी ने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत काट दिया। उस समय से ही गणेश जी एकदंत कहलाने लगे। गणेश जी ने अपने टूटे हुए दांत को लेखनी बना लिया और इससे पूरा महाभारत ग्रंथ लिख डाला। यह गणेश जी की बुद्घिमत्ता का परिचय है। गणेश जी अपने टूटे हुए दांत से यह सीख देते हैं कि चीजों का सदुपयोग किस प्रकार से किया जाना चाहिए।

गणपति की सूंड- गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती डुलती रहती है, जो उनके हर पल सक्रिय रहने का संकेत है। यह हमें ज्ञान देती है कि जीवन में सदैव सक्रिय रहें। जो व्यक्ति ऐसा करता है, उसे कभी दुख: और गरीबी का सामना नहीं करना पड़ता है। शास्त्रों में गणेश जी की सूंड की दिशा का भी अलग-अलग महत्त्व बताया गया है।

बड़ा उदर- गणपति का पेट बड़ा है। इस कारण इन्हें लंबोदर भी कहा जाता है। लंबोदर होने का कारण यह है कि वे हर अच्छी-बुरी बात को पचा जाते हैं और किसी भी बात का निर्णय सूझबूझ के साथ लेते हैं। गणेश जी का बड़ा पेट हमें यह ज्ञान देता है कि भोजन के साथ-साथ बातों को भी पचाना सीखें, जो व्यक्ति ऐसा कर लेता है। वह हमेशा ही खुशहाल रहता है।

लंबे कान- गणेश जी के कान सूप जैसे बड़े हैं, इसलिए इन्हें गजकर्ण-सूपकर्ण भी कहा जाता है। गणेश जी के लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि वह सबकी सुनते हैं, फिर अपनी बुद्धि-विवेक से निर्णय लेते हैं। बड़े कान हमेशा चौकन्ना रहने के भी संकेत देते हैं। गणपति के सूप जैसे कान से शिक्षा मिलती है कि जैसे सूप खराब चीजों को छांटकर अलग कर देता है। उसी तरह जो भी व्यर्थ बातें आपके कान तक पहुंचती हैं। उसे बाहर ही छोड़ दें। उन्हें अपने अंदर न आने दें।

बड़ा मस्तक- गणेश जी का मस्तक काफी बड़ा है। अंग विज्ञान के अनुसार बड़े सिर वाले व्यक्ति नेतृत्व करने में योग्य माना जाता है। इनकी बुद्घि कुशाग्र है। गणेश जी का बड़ा सिर यह भी ज्ञान देता है कि अपनी सोच को बड़ा बनाए रखना चाहिए।

छोटी आंखें- गणपति की आंखें छोटी हैं। अंग विज्ञान के अनुसार छोटी आंखों वालों को चिंतनशील और गंभीर प्रकृति के माने जाते हैं। गणेश जी की छोटी आंखें यह ज्ञान देती हैं कि हर चीज को सूक्ष्मता से देख-परख कर ही कोई निर्णय लेना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति कभी धोखा नहीं खाता।