19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मूस की जगह ड्रेगन पर सवार गणेश, हाथों में लड्डू की जगह मूली, विश्वभर में अलग-अलग रूपों में गणेशजी

रिटायर्ड आइपीएस सुभाष अत्रे के पास 10 देशों के एक हजार से ज्यादा गणेशजी का कलेक्शन

2 min read
Google source verification
ganeshji.jpg

भोपाल। राजधानी के रिटायर्ड आइपीएस सुभाष अत्रे के पास 10 देशों के एक हजार से ज्यादा भगवान गणेश की मूर्तियों का कलेक्शन है। अत्रे का कहना है कि मुझे बचपन से ही गणेशजी के बारे में पढ़ना अच्छा लगता था, जितना उनके बारे में पढ़ता गया, मूर्ति संग्रह का शौक भी बढ़ता गया। नौकरी के दौरान जहां भी पोस्टिंग होती थी, वहां अनोखे आकार और स्वरूप वाले गणेशजी की मूर्ति को संग्रह करता रहता। सेवानिवृत्त होने के बाद जिस देश की भी यात्रा की, वहां से भी उनकी मूर्तियां लेकर आया। कई बार फ्लाइट स्टाफ भी पूछता था कि इतनी सारी मूर्तियों का आप क्या करेंगे।

गणेशजी के स्वरूपों पर लिखी किताब

अत्रे के कलेक्शन में गोबर, मिट्टी, लकड़ी, पीतल, अष्टधातू, पत्थर, सीप, शंख, सुपारी, अनाज और रत्न से बनीं गणेश प्रतिमाएं हैं। कई प्रतिमाएं दो, चार, छह, आठ, बार और सोलह हाथ वाली हैं तो कई 5 एमएम से लेकर 4 फीट तक के साइज की है। ताजवर्थ, पन्ना, मोती, टाइगर स्टोन और कैट्स आई जैसे रत्नों की मूर्तियों का भी संग्रह है। मैंने विश्वभर में पाए जाने वाले स्वरूपों पर एक किताब भी लिखी है। अत्रे कहते हैं, भगवान गणेश लोक देवता है, आम जन अपनी भावनाओं के अनुरूप उनकी प्रतिमाओं को विभिन्न आकार दे देते हैं। इसके जरिए वे भगवान से अपना प्यार और भावनाएं व्यक्त करते हैं।

हर देश में अलग-अलग नामों से पूजा जाता है

अत्रे बताते हैं भगवान गणेश को अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामों से पूजा जाता है। चीन में शीनतेन तो जापान में कांगीतेन नाम से पूकारा जाता है। बाली में शेर जैसे मुंह के साथ स्थानीय मुखौटे पहनाकर मूर्ति बनाई जाती है। जापान की मूर्ति में युगल गणेश एक-दूसरे से गणेश मिल रहे हैं।

बाइसन का मुकुट करते हैं धारण

अत्रे बताते हैं, चीन की मूर्ति में वे मूस की जगह ड्रेगन पर शस्त्र के साथ सवार लिए नजर आते हैं। कंबोडिया में इन्हें प्रेसन गणेश नाम से संबोधित किया जाता है। थाइलैंड से जो प्रतिमा लाया हूं, उसमें गणेशजी के हाथ में लड्डू की जगह मूली है। प्रतिमा की हेयर स्टाइल भी बहुत अनोखी है। वहीं, नेरोबी से लकड़ी की मूर्ति लेकर आया था, इसमें वे एक पैर नीचे की ओर लटकाए हैं, नीचे की ओर से मसाई जनजाती के दो लोग बैठे हैं। वहीं, बस्तर की प्रतिमा में वे माडि़या जनजाति का बाइसन मुकुट पहन है। रिद्धि-सिद्धि, इस जनजाति की महिलाओं की तरह कंधे पर बच्चों को बैठाए हैं।