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गणेश चतुर्थी 2017: जानिए अनंत चतुर्दशी का महत्व, गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त

अनंत चर्तुदशी के दिन बप्पा की मूर्ति का विसर्जन (ganesh visarjan) किया जाता है।

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ganesh visarjan on anant chaturdashi

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल समेत देश में इस साल गणेश चतुर्थी (ganesh visarjan) का त्योहार 25 अगस्त से शुरू होकर 5 सितंबर तक मनाया गया। भगवान गणेश को खुशी, समृद्धि और भाग्य का अग्रदूत माना जाता है, इसके चलते पूरे देश में उनके भक्त उन्हें शानदार तरीके से विदा करते हैं।


पंडित सुनील शर्मा के अनुसार जिन भक्तों ने अपने घरों में गणपति की मूर्ति की स्थापना की होती है वे लोग अनंत चर्तुदशी के दिन बप्पा की मूर्ति का विसर्जन (ganesh visarjan) करते हैं। जिसका मतबल होता है कि भगवान गणेश के भक्तों ने उन्हें वापस उनके घर भेज दिया है।

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को हर साल अनंत चतुर्दशी के रूप में भी मनाया जाता है। गणेशोत्सव के तहत घर में विराजे गणपति इसी दिन विदा होते हैं यानी इसी दिन गणपति विसर्जन भी किया जाता है।

इस बार अनंत चतुर्दशी पर्व (anant chaturdashi 2017) 5 सितंबर को है। गणपति के पूजन के साथ-साथ इस दिन भगवान विष्णु का पूजन भी किया जाता है, साथ ही पूजन के बाद 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांह में बांधा जाता है।

ऐसे करें अनंत चतुर्दशी (anant chaturdashi) का व्रत :
पंडित शर्मा के अनुसार इस व्रत को करने वाले को सुबह स्नान करने के बाद व्रत करने का संकल्प करें। शास्त्रों में कहा गया है की व्रत का संकल्प और पूजन किसी पवित्र नदी या फिर तलाब के तट पर ही करना चाहिए। यदि ये संभव न हो सके तो फिर घर में भी कलश स्थापित कर सकते है। कलश पर शेषनाग के ऊपर लेटे भगवान विष्णु जी की मूर्ति या फोटो स्थापित कर सकते हैं।

भगवन श्री विष्णु जी के सामने चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र (डोरा) को एक जल पत्र खीरा से लप्पेट कर ऐसे घुमाएं। कहते हैं की इसी तरह समुद्र मंथन किया गया था, जिससे अनंत भगवान मिले थे।
मंथन के बाद 'ॐ अनंतायनम:'मंत्र से भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की पूरी विधि से पूजा करें। पूजा के बाद अनंत सूत्र को मंत्र पढ़ने के बाद पुरुष अपने दाहिने हाथ में और स्त्री बाएं हाथ में बांध लें।


अनंत सूत्र बांधने का मंत्र :
अनंत सागर महासमुद्रे मग्नान्समभ्युद्धर वासुदेव. अनंत रूपे विनियोजितात्माह्यनन्त रूपायनमोनमस्ते

गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त :
गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त सुबह का मुहूर्त (चार, लाभ, अमृत) 09:32 बजे- 14:11 अपराह्न है.
दोपहर का मुहूर्त (शुभ) = 15: 44 बजे- 17:17 बजे
शाम का मुहूर्त(प्रयोग) = 20:17 अपराह्न - 21: 44 बजे
रात का मुहूर्त (शुभ, अमृत, चार) = 23:11 बजे

ऐसे करें गणेश विसर्जन :
बप्पा का विसर्जन करने से पहले भगवान गणेश की आरती की जाती है। तिलक लगाकर, फल और मोदक चढ़ाकर मंत्रो का उच्चारण करते हैं। इसके बाद भगवान को चढ़ाया गए फल और मिठाई को लोगों को बांटा जाता है। पूजा स्थान से गणपति की प्रतिमा को उठाएं। साथ में फल, फूल, वस्त्र और मोदक रखें। इस पूजा में दीपक, धूप, पुष्प, चावल और सुपारी को एक लाल कपड़े में बांध कर रख लें. जिसे विसर्जन के दौरान प्रयोग करें।