
भोपाल. शहर में 160 स्थानों पर गेंट्री स्थापित करने का ठेका लेकर 197 स्थानों पर गेंट्री लगाने वाली यूनिकॉर्प के गेंट्री बोर्ड 40 किमी प्रति घंटे से चलने वाली हवा के सामान्य दबाव सहने लायक भी नहीं हैं। इस मामले में शुरुआत से ही नगर निगम के अफसर कंपनी पर खासे मेहरबान थे।
शहर के प्रमुख मार्ग और चौराहों पर भारी भरकम गैंट्री लगाने से पहले कंपनी ने पीडब्ल्यूडी, सीपीए, बीडीए जैसी संस्थाओं से किसी प्रकार की मंजूरी नहीं ली। यहां तक कि स्ट्रेन्थ सार्टिफिकेट भी नहीं लिया। प्रोजेक्ट देख रहे नगर निगम के पूर्व उपायुक्त राहुल सिंह और सिटी इंजीनियर पीके जैन ने कंपनी को अपने स्तर पर स्ट्रेन्थ रिपोर्ट बनाकर दे दी। खुलासा निगमायुक्त प्रियंका दास के शोकॉज नोटिस के बाद हुआ। 1 मई को बाणगंगा में गेंट्री गिरने के5 दिन बाद भी संचालक गौरव कुलश्रेष्ठ ने स्ट्रेंन्थ टेस्ट की रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
यह है विंड प्रेशर टेस्ट
बिल्डिंग परमिशन एक्ट के प्रावधानों को पूरा करने चार मंजिला भवन से अधिक ऊ ंचाई का निर्माण होने पर शहर में डेवलपर्स को विंड प्रेशर टेस्ट कराना अनिवार्य है। टेस्ट परिणाम विंड प्रेशर मीटर और निर्माण के कुल वजन के आंकड़ों पर आधारित होते हैं। यूनिकॉर्प इस नियम के उल्लंघन में फंस गई है। कंपनी को बिल्ट, ऑपरेट और ट्रांसफर मोड पर नगर निगम ने अगले दस साल के लिए शहर में गेंट्री लगाकर विज्ञापन से कमाई करने का करार किया है।
मौजूदा ढांचा तुरंत हटाने की जरूरत
यूनिकॉर्प ने शहर में सभी स्थानों पर एक जैसे कांक्रीट प्लेटफॉर्म बनाकर 12 इंच के एल्यूमिनियम नट बोल्ट पर भारी भरकम ढांचें खड़े किए हैं। 300 से 400 वर्गफीट के होर्डिंग्स को संभालने का पूरा भार एल्यूमिनियम शीट से बने खोखले पाइप पर है। तेज हवा चलने पर होर्डिंग्स पर भारी दबाव निर्मित होता है, जिससे पाइप का निचला हिस्सा आसानी से मुड़कर एक तरफ झुक रहा है। जानकारों की राय में इस तरह के ढांचे तत्काल हटाए जाने की जरूरत है।
जब तक कंपनी का जवाब नहीं आता, तब तक कुछ कहना ठीक नहीं होगा। जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई करेंगे।
- प्रियंका दास, निगमायुक्त
विंड प्रेशर टेस्ट किए बगैर इस तरह के निर्माण जनता की जान से खिलवाड़ है।
- राजेश चौरसिया, सचिव, एमपी स्ट्रक्चरल इंजीनियर एसोसिएशन
Published on:
06 May 2018 07:31 am

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