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ईवी से होगा डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, हर माह 9 करोड़ की होगी बचत

नगरीय प्रशासन विभाग प्रस्ताव कर रहा तैयार, स्वच्छता सर्वेक्षण में भी निकायों को होगा फायदा

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अभी प्रदेश में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए 413 नगरीय निकायों में 6 हजार से ज्यादा वाहनों का उपयोग किया जाता है। अगले कुछ वर्षों में कचरा कलेक्शन में ई-व्हीकल का उपयोग किया जाएगा। नगरीय प्रशासन विभाग इसे लेकर प्रस्ताव तैयार कर रहा है। ईवी का उपयोग होने से नगरीय निकायों को हर माह ईंधन पर खर्च होने वाली करीब 9 करोड़ की राशि की बचत होगी। इसे लेकर एक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा रहा है।

विभाग 250 वाहनों को बदलेगा ईवी में

नगरीय प्रशासन विभाग पहले चरण में करीब 250 गाड़ियों को ईवी में बदलने का प्रयास कर रहा है। केंद्र से मिलने वाले फंड से इनकी खरीद की जाएगी। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत इन वाहनों को निकायों में भेजा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार बड़े शहरों में कचरे को ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचाने में बड़ी राशि खर्च करना होती है। ईवी चलने से निकायों को खर्च भी कम होगा। साथ ही प्रदूषण के स्तर को कम करने में भी मदद मिलेगी। कचरा कलेक्शन में अभी तक देश में कहीं भी ईवी का उपयोग नहीं किया जा रहा, यह अपने आप में अनूठा प्रयोग होगा। स्वच्छ वायू और स्वच्छता सर्वेण में भी नवाचार के लिए निकायों को अतिरिक्त अंक जुटाने का मौका मिलेगा।

रेट्रोफिटिंग कर बदला जाएगा ईवी में

अभी हर नगरीय निकायों के पास ऐसे सैकड़ों बड़े-छोटे वाहन हैं, जो दशकों पुराने हो चुके हैं। इनका इस्तेमाल करना पर्यावरण की दृष्टि से भी नुकसानदेह साबित हो रहा है। इन वाहनों को ईवी में बदला जाएगा। एक वाहन पर डेढ़ से दो लाख रुपए तक खर्च होगा। निकाय इनका इस्तेमाल भी डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में कर सकेंगे।