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सरकार ने निजी कंपनियों में भी लागू किया आरक्षण

सरकार ने निजी कंपनियों में भी लागू किया आरक्षण - सरकार ने जारी की मध्य प्रदेश एमएसएमई विकास नीति-2019- उद्योगों के साथ प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने की कवायद - आरक्षण न देने वाली कंपनियों को नहीं मिलेगा सरकार के उद्योग प्रोत्साहन योजना का लाभ- औद्योगिक इकाइयों में एसटी-एससी और ओबीसी को मिलेगा 70 प्रतिशत आरक्षण का लाभ

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भोपाल

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Ashok Gautam

Oct 27, 2019

सरकारी विभागों में टेबल-कुर्सी सहित अन्य सामानों की खरीदी पर भी लागू होगा आरक्षण

सरकारी विभागों में टेबल-कुर्सी सहित अन्य सामानों की खरीदी पर भी लागू होगा आरक्षण

भोपाल। प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों की तरह निजी क्षेत्र की कंपनियों में अनुसूचित जाति-जनजाति और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया है। मैग्निफिसेंट एमपी के आयोजन के बाद कमलनाथ सरकार ने एमएसएमई (सुक्ष्म, मध्यम तथा लघु उद्योग ) विकास नीति 2019 जारी की है। इस नीति के अनुसार प्रदेश में एमएसएमई के लिए दी जाने वाली सरकारी सुविधाएं तभी उद्योगों को मिलेगी जब वे प्रदेश के युवाओं को 70 फीसदी रोजगार तो देंगे ही साथ ही इस रोजगार में प्रदेश के आरक्षण नियमों के अनुसार वर्गोँ के लिए पद आरक्षित करेंगे।

प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों विस्तार, परिवर्तन तथा नए संयंत्र लगाने के लिए करोड़ों रुपए अनुदान देने की योजना एमएसएमई नीति में रखी गई है। योजना का लाभ संचालित उद्योग इकाइयों को ही दिया जाएगा। इस योजना का लाभ एक अक्टूबर 2019 से लगने वाले नए उद्योगों तथा पुरानी औद्योगिक इकाइयों के विस्तार करने पर दिया जाएगा।
मप्र एमएसएमई प्रोत्साहन योजना 2019 में सूक्ष्य तथा लघु इकाइयां अगर अपने विस्तार एवं संयंत्रों की स्थापना में न्यूनतम 10 लाख व अधिकतम 15 करोड़ खर्च करती है तो उन्हें नए उद्योगों के समान सुविधाओं के साथ ही अनुदान दिया जाएगा।

वहीं मध्यम इकाइयों को सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के लिए उन्नयन, विस्तार और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर एक करोड़ रूपए खर्च करना पड़ेगा। अगर ये इकाइयां इन कार्यों पर 15 करोड़ रूपए से अधिक राशि खर्च करती है तो इन्हेंं योजना का लाभ नहीं मिलेगा। नीति में इस बात को इन शर्तों को शामिल किया गया कि वे औद्योगिक इकायों के सभी मानदंडों को अनिवार्य रूप से पूरा करेंगी तभी उन्हें इसका लाभ मिलेगा।

उद्योग को चार साल तक चलाना अनिवार्य
सरकार से अनुदान लेने के बाद औद्योगिक इकाइयों को संयंत्र चार साल तक अनिवार्य रूप से चलाना पड़ेगा। इसके साथ ही उन्हें उससे किए गए उत्पादन की वार्षिक जानकारी भी सरकार को उपलब्ध करानी होगी। यह इकाइयां अपना संयंत्र अथवा उद्योग सरकार की अनुमति के बिना किसी को भी नहीं बेंच सकेंगे। अनुदान के लेते समय निवेश के संबंध में जो जानकारी सरकार को दी है उससे वे कम पूंजी निवेश नहीं कर सकेंगे। बिना सूचना के 6 माह तक इकाई बंद करने पर संचालक अथवा संस्था से दी गई अनुदान की राशि को 12 प्रतिशत दंड व्याज के साथ वसूला जाएगा।

निर्धारित भूमि पर ही लगा सकेंगे उद्योग
नगर निगम सीमा में सूक्ष्य, लघु तथा मध्यम उद्योग मास्टर प्लाने में तय किए गए भूखंडों पर ही लगाने पर योजना का लाभ उद्योगिक इकाइयों को दिया जाएगा। इसके साथ ही यह लाभ लेने के लिए उद्योग विभाग के द्वारा आरक्षित की गई शासकीय भूमि में उद्योग लगाने पर ही उन्हें इस योजना में शामिल किया जाएगा। औद्योगिक इकाइयों को अपशिष्ठ प्रबंधन इकायां भी स्थापित करना होगा।

वेतन अनुदान के लिए देनी होगी 6 माही जानकारी
रेडीमेड गारमेंट एवं मेडअप्स इकाइयों को वेतन अनुदान लेने के लिए उन्हें कर्मचारियों की 6 माही जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही उन्हें अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इन इकाइयों को कर्मचारियों का नाम, मप्र निवास प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज जिला व्यापारी उद्योग केन्द्र में देना होगा।

ऐसे मिलेगा अनुदान
औद्योगिक इकाइयों को अनुदान देने के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति बनेगी। समिति में अग्रणी जिला प्रबंधक उद्योग सदस्य और जिला उद्योग एवं व्यापार केन्द्र महाप्रबंधक सदस्य सचिव होंगे। उद्योगों द्वारा दिए गए आवेदनों की पड़ताल करेंगे। इसके बाद इस प्रस्ताव को सरकार के समक्ष पेश कर उन्हें अनुदान देने का प्रस्ताव भेजेंगे।

एमएसएमई विकास नीति जारी की गई है। इस नीति में प्रदेश की योजनाओं और अनुदान का लाभ लेने वाले उद्योगों को आरक्षण नियमों का पालन करने का भी प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश के युवाओं और वंचित वर्ग को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
आरिफ अकील, एमएसएमई मंत्री, मप्र