
सरकारी विभागों में गड़बड़ी
भोपाल. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानि कैग की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश में सरकार की कई गड़बड़ी उजागर हुई है। खनिज प्रबंधन में भारी लापरवाही की गई और खनन में 206.21 करोड़ की चपत लगी है। टैक्स वसूली में लापरवाही की जा रही है। और तो और, हजारों करोड़ रुपए तो कई साल में भी वसूले नहीं जा सके हैं।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक कैग ने अपनी जांच में पाया कि प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग के तहत ही 5174.71 करोड़ रुपए बरसों से बकाया हैं। इसमें 2594.04 करोड़ रुपए तो ऐसे हैं, जो पांच साल से ज्यादा समय से बकाया हैं। इनकी वसूली में पूरा तंत्र विफल रहा है।
कैग रिपोर्ट विधानसभा में सोमवार को पेश की गई जिसमें बताया है कि प्रदेश में कई जिलों में माइनिंग फंड का कोई इस्तेमाल नहीं किया गया। कैग ने खनिज उपलब्धता वाले 22 प्रमुख जिलों में जांच में पाया कि जिन नौ जिलों में सबसे ज्यादा खनिज राजस्व है, वहां खनिज निधि बेकार पड़ी रही। खनिज कोष के प्रबंधन में देरी, रॉयल्टी में देरी, गलत सर्वे जैसी खामियों के कारण 206.21 करोड़ की चपत स्थानीय खनिज कोष को लगी।
जिला खनिज राशि के भुगतान को लेकर कई जगह रजिस्टर तक नहीं बनाया गया। 2018-19 से 2020-21 के अभिलेखों की जांच में कैग ने पाया कि स्थानीय समिति की बैठकें तक नहीं हुईं। बुनियादी ढांचे के निर्माण में लापरवाही बरती गई।
विलंबित भुगतानों पर ब्याज न वसूलना, डीएमएफ में निधि का व्यर्थ पड़े रहना, कार्य निष्पादन करने वाली एजेंसियों से अप्रयुक्त राशि की वसूली न होना जैसी गड़बड़ी भी मिलीं। 12302.16 करोड़ में से 1163.28 करोड़ खर्च किए गए। 31 मार्च 2021 को 1189.88 करोड़ रुपए की डीएमएफ निधि बिना उपयोग पड़ी रही।
Published on:
14 Mar 2023 10:22 am
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