
भोपाल। पूर्व केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा खेती को निरंतर हतोत्साहित करने के संबंध में पत्र लिखा। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि किसान पुत्र ही कृषि प्रधान प्रदेश में किसानों को हतोत्साहित कर रहा है। उन्होंने पत्र में लिखा कि सीएम शिवराज, किसानों को अब खेती छोड़ नौकरी और उद्योग लगाने की सलाह दे रहे हैं। पीएम मोदी इस पर हस्तक्षेप कर रोक लगाए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि देश की कृषि प्रधान प्रदेश मध्यप्रदेश में एक समय, यदि कोई सबसे ज्यादा सुखी माना जाता था, तो वह अन्नदाता किसान था। उस अपनी फसलों के वाजिब दाम भी मिलते थे। जिससे किसान का जीवनचक्र ठीक ढंग से चलता था।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश में खेती निरंतर घाटे का सौदा बनती गयी। सरकार की नीतियों से किसान निरंतर कर्ज के बोझ में दबता गया। जिसके परिणामस्वरूप आज मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे है।
किसानों को शिवराज सरकार से काफी उम्मीदें थी कि वो किसानों के हित में अच्छी योजनाएं लाएंगे। उनका कर्ज माफ कर उन्हे राहत प्रदान करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। पहले शिवराज सरकार ने किसानों का दमन किया और अब शिवराज सरकार निरंतर खेती को हतोत्साहित करने में जुट गयी है। प्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान, मंदसौर में किसानों पर दमनचक्र चलाकर उन पर गोलियां दागी गयी। पूरे प्रदेश में किसानों पर मुकदमें लादे गये, लाठियां बरसायी गयी, जेलों में ठूंसा गया, उस दमनचक्र के बाद भी किसान का हौसला कम नहीं हुआ। प्रदेश के टीकमगढ़ में किसानों के कपड़े उतारकर उन्हे जेल में बंद किया गया। फिर भी प्रदेश का किसान हंसकर, इस दमनचक्र को सहन करता रहा।
उन्होंने लिखा कि इस दमनचक्र से शिवराज सरकार किसानों के हौसले को पस्त नहीं कर पायी तो अब सरकार ने नये एजेंडे पर कार्य करते हुए किसानों को हतोत्सहित करने शुरू कर दिया है। शिवराज और उनकी सरकार निरंतर इसी दिशा में कार्य कर रही है। वो निरंतर हर कार्यक्रम में किसानों को खेती छोड़ नौकरी उद्योग में आने की सलाह दे रहे है। सरकार के नुमाइंदे भी इस कार्य में जोर-शोर से लग गए है। पहली बार इतिहास में ऐसा हो रहा है कि एक किसान पुत्र ही किसानों को खेती के लिए हतोत्साहित कर रहा है।
शिवराज के सीएम के रूप में 12 वर्ष पूरे होने के जश्न में भी रतलाम जिले के जावरा में भी शिवराज ने खेती को हतोत्साहित करने का संबोधन दिया। उन्होंने किसान पुत्रों को उद्योग व रोजगार के लिए सरकार की गारंटी पर लोन देने की बात कही।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कारण पूछते हुए लिखा कि शिवराज किसान पुत्रों को उद्योग के लिए तो मदद करने की बात कह रहे है। परंतु घाटे में चल रहे किसान की कर्ज माफी या कोई अन्य आर्थिक मदद की बात क्यों नहीं करते है। शिवराज के निरंतर दिये जा रहे। इन बयानों से कृषि प्रधान प्रदेश के किसानों का खेती से मोह भंग होता जा रहा है और वे खेती के प्रति हतोत्साहित हो रहे है।
उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी 2022 तक खेती को लाभ का धंधा बनाने की बात कहते है। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज खेती को घाटे का सौदा बताने में लगे है और किसानों को खेती छोड़ने की सलाह देकर किसानों को हतोत्साहित करने लगे है।
Published on:
01 Dec 2017 05:24 pm
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