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सरकार का बड़ा कदम, गली-गली मिलेंगे अब जमीनों के नक्शे

- लागू की नई व्यवस्था, पिछले हफ्ते मंजूरी, गुरुवार को हुआ करार  

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भोपाल। प्रदेश MP में अब गली-गली में जमीनों के नक्शे, नामांतर-बंटवारा और खसरा-खतौनी की कॉपी मिल पाएगी। अभी तक यह केवल सूबे के लोक सेवा गारंटी केंद्रों के 330 कियोस्क पर ही मिलते थे, लेकिन पिछले हफ्ते सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए जमीन के नक्शे, खसरे-खतौनी की नकल देने की व्यवस्था को गांव-गांव में खुले एमपी आनलाइन के सेंटरों पर भी देने की व्यवस्था लागू कर दी है।

इसके लिए बीते गुरुवार को एमपी आनलाइन से करार हो गया है। यह क्रियान्वयन मैदान में अगले महीने से शुरू हो जाएगा। इसके बाद अगले चरण में जमीनों का चालीस साल से ज्यादा का रिकार्ड भी इसी प्रकार आनलाइन देने की तैयारी है।

राज्य सरकार दो साल से इस प्रोजेक्ट को लागू करने की तैयारी में थी, लेकिन नवंबर २०१८ में विधानसभा चुनाव के पूर्व यह मामला ठप हो गया था। अब कमलनाथ सरकार ने इस व्यवस्था को जनता के हित में लागू कर दिया है। इसके तहत एमपी आनलाइन के प्रत्येक सेंटर पर नक्शे व खसरा-खतौनी और अन्य जमीन संबंधित रिकार्ड की कॉपी मिल जाएगी।

इसके लिए संबंधित व्यक्ति को एक निश्चित शुल्क चुकान होगा। अगले एक हफ्ते में यह व्यवस्था मैदानी तौर पर क्रियान्वित होने लगेगी। राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने प्रोजेक्ट को मंजूरी देकर पिछले गुरूवार को इसका एमपी आनलाइन से अनुबंध कर लिया है। इसके बाद राजस्व विभाग ने एमपी आनलाइन को इसके क्रियान्वन के लिए लिखा है। इस व्यवस्था में एमपी आनलाइन एक निश्चित शुल्क लेगा।

28 हजार से ज्यादा सेंटर-

दरअसल, अभी तक लोकसेवा गारंटी के केंद्रों पर ही यह सुविधा थी। इसमें लोकसेवा के करीब३३० कियोस्क केंद्रों पर नक्शे व खसरा-खतौनी मिल पाते थे, लेकिन एमपीआनलाइन के 28 हजार से ज्यादा केंद्र हैं।

इससे अब इन 28 हजार केंद्रों पर भी नक्शे मिलेंगे। इससे गांव-गांव में किसान और अन्य लोगों के लिए नक्शे व खसरा-खतौनी निकालना आसान हो जाएगा। हालांकि आनलाइन नक्शे निकालने की सुविधा पूर्व से उपलब्ध है, लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं होता है।


इनकी कॉपी लेने की रहेगी सुविधा-
जमीन का नक्शा, खसरा-खतौनी, बंटवारा प्रमाण-पत्र, नामांतरण, आपदा वित्तीय सहायता व राजस्व न्यायालय के आदेश की कॉपी।

हर दिन हजारों आवेदन-

प्रदेश में 28 हजार से ज्यादा केंद्रों पर यह सुविधा मिलने से सरकारी कामकाज में गति आएगी। इसमें जिला कलेक्टर कार्यालय के चक्कर भी नहीं काटने होंगे। दरअसल, जमीन के नक्शे, खसरा-खतौनी, बंटवारा व नामांतरण के हर दिन प्रदेश में हजारों आवेदन होते हैं। इनमें कॉपी निकालने के लिए लोकसेवा केंद्रों के भरोसे ही रहना पड़ता है। वर्तमान में ४.७८ लाख से ज्यादा आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।

चालीस साल का रिकार्ड मिलेगा-
सरकार अब जमीनों का पूरा रिकार्ड आनलाइन आवेदन पर ही देने का प्रोजेक्ट ला रही है। इसका वर्क आर्डर अगले हफ्ते तक हो सकता है। इसके तहत यदि जमीन का चालीस साल पुरा रिकार्ड भी चाहिए, तो वह आनलाइन आवेदन करने पर एमपी आनलाइन के कियोस्क पर मिलेगा।

इनका कहना-

अभी तक चुनिंदा लोकसेवा केंद्रों पर ही जमीन के नक्शे व खसरा-खतौनी मिलते थे, लेकिन अब गांव-गांव में नक्शे, खसरा-खतौनी मिल पाएंगे। करीब २८ हजार से ज्यादा केंद्रों पर अब यह व्यवस्था रहेगी। आगे जमीनों का पूरा रिकार्ड हम आनलाइन कर रहे हैं।

- गोविंद सिंह राजपूत, मंत्री, राजस्व विभाग, मप्र

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