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केंद्र का राज्यों को पत्र: गरीबों को बांटे जाने वाले गेहूं में कटौती और चावल में बढ़ौतरी, वहीं इधर हुआ ये बड़ा बदलाव

बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ने से योजनाओं पर असर, अब दो किलो मिलेगा गेहूं

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भोपाल । Bhopal
सरकार की योजनाओं पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ने का सीधा असर पड़ने के आसार हैं। केन्द्र सरकार ने अब गरीबों को बांटे जाने वाले गेहूं की मात्रा तीन किलो से घटाकर दो किलो कर दी है, जबकि चावल की मात्रा दो किलो से बढ़ाकर तीन किलो की है। इस संबंध में केन्द्र ने राज्य सरकारों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। अगले महीने से राज्य में यह व्यवस्था लागू हो सकती है।

ऐसे में जहां कुछ लोग इस बदलाव को उचित मान रहे हैं तो वहीं कुछ इसे गरीबों की योजना पर डाका करार दे रहे हैं। जहां तक अधिकांश लोगों का मानना है कि सरकार ने चाहे गेहूं में 1 किलो की कमी की हो लेकिन उसकी पूर्ति के लिए 1 किलो चावल में वृद्धि कर दी है। तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि गरीब हमेशा ही रोटी को तव्ज्जों देता रहा है। वह इसे प्याज या नमक के साथ भी खा लेता है, लेकिन चावल के साथ ये स्थिति नहीं है, ऐसे में इस बदलाव से गरीब प्रभावित होंगे।

ऐसे समझें मध्यप्रदेश की स्थिति
दरअसल, मध्यप्रदेश में इस वर्ष करीब 40 लाख टन गेहूं की खरीदी हुई है, जो अपेक्षाकृत कम है। समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने की तारीख बढ़ाने के बाद भी केन्द्र खाली पड़े हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि 30 मई तक एक-दो लाख टन गेहूं की खरीदी और हो सकती है। बाजार में गेहूं की कीमतें ज्यादा होने से मंडियों में आवक ज्यादा है। सरकार के पास वर्तमान में डेढ़ सौ लाख टन अनाज का भंडारण है। इसमें से सरकार 30 लाख टन गेहूं खुले बाजार में बेच रही थी। 12 लाख टन बेच भी चुकी थी, पर अब नहीं बेचेगी।

30 लाख मीट्रिक टन का प्रति वर्ष वितरण
सरकार प्रदेश में 1 करोड़ 18 लाख गरीब परिवारों और टेकहोम राशन में करीब 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक प्रति वर्ष गेहूं बांटती है। इसके अनुसार तो वर्तमान में स्थिति बेहतर है, लेकिन यदि यही स्थिति रही तो अगले साल गरीबों को अनाज बांटने में गेहूं की कमी हो सकती है।

बड़ा बदलाव: इधर, आरक्षण हुआ प्रभावित
वहीं दूसरी ओर आरक्षण पर मध्यप्रदेश के 11 जिलों में ओबीसी को आरक्षण का ज्यादा लाभ नहीं मिल सकेगा, क्योंकि यहां अनुसूचित जाति (एससी)-अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आबादी 4 लाख से ज्यादा है।

धार-बड़वानी में तो आबादी 9.5 लाख से भी अधिक है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार आरक्षण 50% से अधिक नहीं होगा। एससी-एसटी की संख्या कम होने की स्थिति में भी ओबीसी को 35% से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकेगा।

जनगणना 2011 के अनुसार वैसे भी प्रदेश में एससी-एसटी की जनसंख्या 4.87 करोड़ से अधिक है, जबकि प्रदेश में कुल जनसंख्या 7.26 करोड़ से अधिक है। अब ओबीसी को आरक्षण का फायदा सिर्फ 2.38 करोड़ में ही मिलना है।

इससे ओबीसी को ज्यादा आरक्षण का लाभ मिलने की संभावना कम है। इधर, ओबीसी को आरक्षण का लाभ उनके वार्ड में जनसंख्या के आधार पर तय किया जाना है। सरकार सभी तरह के गुणा-भाग को अपनाते हुए निकाय और पंचायतों में 25 मई से पहले आरक्षण कर रिपोर्ट आयोग को सौंप देगी। मतदाता सूची 2022 के अनुसार प्रदेश में 5.58 करोड़ से अधिक वोटर हैं।